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द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-6]-महाकालेश्वर

‘ ऊँ महाकाल महाकाय , महाकाल जगत्पते। महाकाल महायोगिन् ‌ महाकाल नमोऽस्तुते॥ - महाकाल स्त्रोत(महाकाय, जगत्पति, महायोगी महाकाल को नमन) ...

अदालज वाव

 पहले समय में पानी के संग्रहण के लिए गहरे  कुएं खुदवाए जाते थे जिन्हें हम बावड़ी /वाव भी कह सकते हैं.राजस्थान और गुजरात में आप को ऐसे कई सुन्दर सीढ़ीनुमा वाव देखने को मिल जायेंगे .रानी की वाव ,चाँद बावड़ी,जूनागढ़ की  अड़ीकड़ी वाव आदि बहुत सी वाव उल्लेखनीय हैं .जिनके बारे में बाद में बताएँगे ,आज एक बहुत ही सुन्दर वाव के बारे में जानकरी देंगे.. स्थापत्य कला के इस अद्भुत नमूने का  नाम अडालज वाव है.
अदालज /अडालज वाव-
गुजरात राज्य के अहमदाबाद से 18 किलोमीटर दूर अदालज गाँव में यह वाव स्थित है.








अदालज की वाव 


यह पहली मंज़िल पर लगे संमरमर के पत्थर पर संस्कृत में लिखे आलेख से मालूम होता है कि इसे १४९९ में रानी रुदाबाई ने अपने पति की याद में बनवाया था.वह राजा वीरसींह की पत्नी थीं.

यह वाव पाँच मंज़िला है और अष्टभुजाकार बना हुआ है.वास्तुकला का नायाब नमूना यह ढाँचा १६ स्तंभों पर खड़ा है.
सूरज की रोशनी सीधा दीवारों पर सिर्फ़ थोड़े समय के लिए ही पड़ती हैं. इसीलिए बाहर से भीतर का तापमान ६ डिग्री कम रहता है.

गाँववाले सुबह आते हैं और दीवारों पर बने देवी देवताओं की पूजा भी करते हैं. ऐसा भी कहा जाता है कि दीवारों पर बने नव ग्रहों की प्रतिमाएँ इस कुएँ की रक्षा करती हैं. गाँव के लोग अब भी यहाँ पानी भरने और गर्मी के मौसम में ठंडक में बैठने यहाँ आते हैं.

ऐसा कहा जाता है की यहाँ एक मुस्लिम सुल्तान बेघारा ने हमला किया था जिसमें राजा वीर सिह मारे गये थे.बेघारा ने उनकी पत्नी की सुंदरता देख विवाह का प्रस्ताव रखा, जिस पर रानी ने नियत समय पर इस वाव को पूरा कराने की शर्त रखी. वाव नियत समय पर पूरा हुआ.


रानी वाव देखने आईं , चूँकि रानी सुल्तान से शादी नहीं करना चाहती थी इसीलिए पाँचवी मंज़िल से ही पानी में कूद कर अपनी जान दे दी. ऐसा सुना जाता है कि आज भी रानी की आत्मा वहाँ भटकती है.

वाव के पास ही इस वाव को डिज़ाइन करने वाले मुख्य कामगारों की क़ब्रें हैं जिन को इस के पूरा होने के बाद मुस्लिम राजा ने मरवा दिया था ताकि दोबारा फिर कोई इस तरह की वाव ना बनवा सके.
दीवारों पर इस्लामिक प्रभाव वाली कलाकारी को  देखा जा सकता है.


मानव निर्मित इस अद्भुत कलाकारी की इमारत को Archeological Survey of India द्वारा संरक्षित किया गया है.
वाव की एक मंजिल पर मंदिर

दीवारों पर कलाकारी
 [सभी चित्र श्री नवीन राव जी से साभार प्राप्त हुए]
कैसे जाएँ-
हवाई मार्ग-
सरदार वल्लभभाई पटेल एयरपोर्ट अंतर राष्ट्रीय हवाईअड्डा है घरेलू विमान सेवाएँ भी यहाँ से चलती हैं.
रेल मार्ग-
कालुपुर क्षेत्र में मुख्य रेल स्टेशन है.
अहमदाबाद स्टेशन देश के लगभग सभी प्रमुख स्‍टेशनों से सीधे तौर पर जुडा हुआ है.

सड़क मार्ग-
गुजरात राज्य परिवहन की बसें सभी मुख्य शहरों से चलती हैं.

Reference-
http://www.gujarattourism.com/
विडियो देखीये-

10 comments:

नीरज जाट जी said...

इसके बारे में केवल सुना था, अब विस्तार से जानकारी भी हो गयी।

माधव( Madhav) said...

बहुत ही सुन्दर तस्वीरें .

Vijai Mathur said...

बहुत सरल तरीके से इतिहास तथा पर्यटन की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करा दी है.यह मालुम होकर कि,अदालज की इस वाव से आज भी पानी उपलब्ध हो रहा है ,उस समय की वास्तु जानकारी की श्रेष्ठता सिद्ध होती है.कलाकारी सुन्दर तथा उत्कृष्ट है.फोटोमय जानकारी के लिए धन्यवाद.

यशवन्त said...

बहुत ही अच्छी और रोचक जानकारी दी आपने.

सादर

संगीता पुरी said...

आपका यह बहुत बढिया प्रयास है .. आलेख कब अपडेट होते हैं .. पता ही नहीं चल पाता .. आज ईमेल से सब्‍सक्राइब कर रही हूं .. अब सुविधा होगी।

दीर्घतमा said...

बहुत अच्छी जानकारी पर्यटन की दृष्टि तथा हमारी संस्कृति की दृष्टि भी है,अपने बहुत परिश्रम किया है बहुत-बहुत धन्यवाद

आशीष मिश्रा said...

अदालज वाव के बारे में पहली बार जानकारी मिली

चित्र भी बहोत ही अच्छे लगे

आभार

...................

Alka Ray said...

alpana didi aaj aapki bahut post dekhi 3-4 din me ham sab padh lenge
aap bahut acha kaam kar rahi hain.
jin logon ko travel men interest hai wo bahut like karenge ye blog

AVI SHEWADKAR said...

आज तक केवल सुना था, आज चित्र के साथ जानकारी मिली. अति शिघ्र इस एतिहासिक स्थल को भेंट देना है.

Vikas Gupta said...

अच्छी जानकारी