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आज महाराणा प्रताप की जयंती पर चलिये कुम्भलगढ़

महाराणा प्रताप (९ मई, १५४०- १९ जनवरी, १५९७) उदयपुर, मेवाड में शिशोदिया राजवंश के राजा थे. हिंदू कलेंडर के अनुसार उनका जन्म ज्येष्ठ शुक...

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दक्षिण का बनारस -'रामेश्वरम -एक पवित्र तीर्थ'

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अब तक हम ११ ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुके हैं .
ये हैं उन पहले ११ ज्योतिर्लिंगों के लिंक सहित नाम --:
(1) सोमनाथ, (2) मल्लिकार्जुन, (3) महाकालेश्वर, (4) ओंकारेश्वर (5) वैद्यनाथ, (6) भीमशंकर, (7) रामेश्वर,
(8) नागेश्वर, (9) विश्वनाथजी, (10) त्र्यम्बकेश्वर, (11) केदारनाथ, (12) घृष्णेश्वर [घुश्मेश्वर].


अब हम अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचे हैं जो भारत के दक्षिण में स्थित है .दक्षिण का बनारस इस स्थान को इसलिए कहा जाता है क्योंकि उत्तर मे जो मान्यता बनारस की है, वही रामेश्वरम् की दक्षिण में है.

हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी से चारों ओर से घिरा हुआ यह सुंदर द्वीप चेन्नई से लगभग सवा चार सौ मील दूर रामनाथपुरम जिले में है .

श्रीशैल देवस्थान-[भाग-११]- [मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग]

जैसे कि हम अब तक १० ज्योतिर्लिंगों की सैर कर चुके हैं आज हम ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग मल्लिकार्जुन के दर्शन हेतु चलेंगे.

श्रीशैल देवस्थान-

आंध्र प्रदेश  के कुरनूल जिले में घने जंगलों के बीच कृष्णा  नदी [पाताल गंगा] के दायीं ओर स्थित यह एक अति प्राचीन स्थल मल्लिकार्जुन मंदिर है .श्री शैलम पर्वत पर बने इस मल्लिकार्जुन मंदिर में ही स्थापित है बारह ज्योतिर्लिंगों में चौथा स्थान रखने वाला मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग.
भगवान मल्लिकार्जुन का यह देव स्थान नाल्लामलाई पर्वत पर स्थित है.नल्ला का अर्थ है--अच्छा   और माला का अर्थ है पहाड़ी.

द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-१० ]- घुश्मेश्वर/घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

द्वादश ज्योतिर्लिंग में अब तक हम ने ९ ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किये.अप्रैल २००९ , के बाद आज मैं इस की अगली कड़ी प्रस्तुत कर पा रही हूँ.प्रयास रहेगा कि जल्द ही यह श्रृंखला पूरी कर सकूँ.
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घुश्मेश्वर/घृष्णेश्वर  ज्योतिर्लिंग –[महाराष्ट्र ]
महाराष्ट्र के मनमाड से 100 किमी दूर दौलताबाद स्टेशन से लगभग ११ किमी की दूरी पर वेरुल गांव में स्थित हैं.विश्व प्रसिद्ध एलोरा की गुफाएं भी पास में ही स्थित हैं.

द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-9]- त्रयम्बकेश्वर

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त्रयम्बकेश्वर-:
Tryambakeshwar Temple, NasikTryambakeshwar Temple
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक'त्रयम्बकेश्वर 'महाराष्ट्र के नासिक में है.
नाशिक शहर से ४० कि.मी दूर एक छोटे से कस्बे त्रयम्बकेश्वर में ,गोदावरी नदी के किनारे भगवान शंकर का यह ज्योतिर्लिंग है.भक्ति और आस्था के इस पावन स्थल में [धार्मिक मान्यता के अनुसार] काल सर्प योग के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए लोग दूर दूर से यहाँ आते हैं.

द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-8]- भीमशंकर




महाराष्ट्र राज्य में मुंबई से करीब 265 किलोमीटर [via Pune] दूर, पूर्व की ओर भीमा नदी के तट पर भीमशंकर ज्योतिर्लिग स्थित है.
इसके उद्भव की एक कथा इस प्रकार है-
सहमाद्रि पर्वत के शिखर पर स्थित इस ज्योतिर्लिंग का पुराणों में बहुत अधिक महत्व है। आकर्षक हरियाली से घिरे इस तीर्थस्थल तक पहुंचने के लिए बसों का सहारा लेना पड़ता है। पुराणों में वर्णित कथाओं के अनुसार कुंभकरण का बेटा भीम ब्रहृमा के वर से इतना वलशाली हो गया कि उसने सभी देवताओं को हराकर इंद्र को भी परास्त कर दिया। इसके बाद उसने कामरूप के महाराजा सुर्दाक्षण को भी अपने कब्जे में कर लिया। सुर्दाक्षण शिवभक्त थे। उन्होंने कारागार में ही शिवलिंग बनाकर तपस्या शुरू कर दी। भीम ने क्रुद्ध होकर उस ज्योतिर्लिंग को तोडऩा चाहा जिससे रुष्ट होकर शिवजी प्रकट हुए और भीम का बध कर दिया तथा वहीं स्थापित हो गए। जिसके कारण इस ज्योतिर्लिंग को लोग भीमशंकर के नाम से जानते हैं।
दूसरी कथा इस प्रकार-:
सहृयाद्रि और इसके आस-पास के लोगों को त्रिपुरासुर नामक दैत्‍य अपनी असुरी शक्तियों से बहुत सताता था। इस दैत्‍य से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शंकर यहाँ भीमकाय स्‍वरूप में प्रकट हुए। त्रिपुरासुर को युद्ध में पराजित करने के बाद भक्‍तों के आग्रह पर भगवान शंकर वहाँ ज्‍योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हो गए। कहते है कि युद्ध के बाद भगवान शंकर के तन से जो पसीना बहा उस पसीने से वहाँ पर भीमवती नदी का जन्‍म हुआ।
नाना फदनिस [पेशवा ] जी ने यहाँ वर्तमान मंदिर बनवाया था.इसका प्रवेश द्वार लकड़ी का बना हुआ है.
[विभिन्न मतों के अनुसार --शिवपुराण की एक कथा के आधार पर भीमशङ्कर ज्योतिर्लिङ्ग असम के कामरूप जिले में गोहाटी के पास ब्रह्मपुर पहाड़ी पर स्थित बतलाया जाता है। कुछ लोग कहते हैं कि नैनीताल जिले के काशीपुर नामक स्थान में एक विशाल शिवमंदिर है, वहीं भीमशंकर का स्थान है]

द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-७]-ओंकारेश्वर

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अपनी इस यात्रा में आज चलते हैं ओंकारेश्वर नगरी .नर्मदा क्षेत्र में यह ओंकारेश्वर सर्वश्रेष्ठ तीर्थ माना जाता है.मध्य प्रदेश के खंडवा जिले को दक्षिण भारत का प्रवेशद्वार कहा जाता है.यह जिला नर्मदा और ताप्‍ती नदी घाटी के मध्य बसा है.इंदौर शहर से ७७ किलोमीटर दूर,खंडवा जिले में स्थित यह स्थान नर्मदा के दो धाराओं में विभक्त हो जाने से बीच में बने एक टापू पर है, इसे मान्धाता पहाड़ी भी कहा जाता है. नदी की एक धारा इस पर्वत के उत्तर और दूसरी दक्षिण होकर बहती है.

द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-6]-महाकालेश्वर

ऊँ महाकाल महाकाय, महाकाल जगत्पते।
महाकाल महायोगिन्महाकाल नमोऽस्तुते॥
- महाकाल स्त्रोत(महाकाय, जगत्पति, महायोगी महाकाल को नमन)
आज महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए चलते हैं.मध्यप्रदेश के उज्जैन में स्थित ‘दक्षिणमुखी’ इस ज्योतिर्लिंग को स्वयंभू माना जाता है.

'उज्जैन' भारत के मध्य प्रदेश राज्य के मध्य में शिप्रा नदी के किनारे बसा एक अत्यन्त प्राचीन[ पाँच हजार सालसे भी अधिक पुराना] शहर है .
जो कभी राजा विक्रमादित्य [(जिनके नाम से विक्रम संवत चलाया गया]के राज्य की राजधानी थी.
यह एक प्रमुख धार्मिक शहर है जिसे हरिशचन्द्र की मोक्षभूमि, सप्तर्षियों की र्वाणस्थली, महर्षि सान्दीपनि कीतपोभूमि, श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली, भर्तृहरि की योगस्थली, सम्वत प्रवर्त्तक सम्राट विक्रम की साम्राज्य धानी, महाकवि कालिदास की प्रिय नगरी, विश्वप्रसिद्ध दैवज्ञ वराह मिहिर की जन्मभूमि, जो अवन्तिका अमरावतीउज्जयिनी कुशस्थली, कनकश्रृंगा, विशाला, पद्मावती, उज्जयिनी आदि नामों से समय-समय पर प्रसिद्धिमिलतीरही

द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-५]-नागेश्वर

गुजरात के सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के बाद आज यहीं नज़दीक द्वारकापुरी से लगभग 17 मील की दूरी पर 'नागेश्वर मंदिर'चलते हैं .गुजरात राज्य के बारे में संक्षिप्त जानकारी मेरी पिछली पोस्ट में आप यहाँ पढ़ सकते हैं.
'एतद् यः श्रृणुयान्नित्यं नागेशोद्भवमादरात्‌। सर्वान्‌ कामानियाद् धीमान्‌ महापातकनाशनम्‌॥'
अर्थात जो श्रद्धापूर्वक इसकी उत्पत्ति और माहात्म्य की कथा सुनेगा वह सारे पापों से छुटकारा पाकर समस्त सुखों का भोग करता हुआ अंत में भगवान्‌ शिव के परम पवित्र दिव्य धाम को प्राप्त होगा. रुद्र संहिता शिव भगवान को दारुकावने नागेशं कहा गया है.नागेश्वर का अर्थ है नागों का ईश्वर होता. गुजरात प्रांत में द्वारका पुरी से लगभग 17 मील की दूरी पर यह प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग 'नागेश्वर मंदिर' में स्थित है.इस दिव्य ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति और माहात्म्य की कथा आप ने सुनी होगी,जिन्हें नहीं मालूम उनके लिए बता देती हूँ.

द्वादश ज्योतिर्लिंग- [भाग-4]- काशी विश्वेश्वर

भारत के उत्तर में जनसँख्या की हिसाब से सब से बड़ा प्रदेश है उत्तर प्रदेश.उत्तर प्रदेश का ज्ञात इतिहास लगभग ४००० वर्ष पुराना है,जब आर्यों ने अपना पहला कदम इस जगह पर रखा तब वेदिक सभ्यता का उत्तर प्रदेश मे जन्म हुआ.इन्ही आर्यों के नाम पर भारत देश का नाम आर्यावर्त या भारतवर्ष पड़ा था.[भरत आर्यों के एक प्रमुख राजा थे].
मथुरा शहर में जन्मे थे भगवान कृष्ण और भगवान राम" का प्राचीन राज्य कौशल इसी क्षेत्र में था.संसार के प्राचीनतम शहरों में एक माना जाने वाला वाराणसी शहर भी यहीं है.
इस के उत्तर में हिमालय का क्षेत्र -मध्य में गंगा का मैदानी भाग -दक्षिण का विन्ध्याचल क्षेत्र है.यह सबसे अधिक '७१' जिलों वाला प्रदेश है.एशिया का सबसे बड़ा उच्‍च न्‍यायालय इलाहाबाद में है.सोनभद्र जिला, देश का एक मात्र ऐसा जिला है जिसकी सीमाएँ सर्व चार प्रदेशों को छूती हैं.

द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-3]-वैद्यनाथधाम

झारखंड-
अपने नाम के अनुरुप यह मूलत: एक वनप्रदेश है.प्रचुर मात्रा में खनिज की उपलबध्ता के कारण इसे भारत का 'रूर' भी कहा जाता है.
15 नवंबर,2000 [ आदिवासी नायक बिरसा मुंडा के जन्मदिन] के दिन बना यह राज्य भारत का अठ्ठाइसवाँ राज्य है.इसे बिहार के दक्षिणी हिस्से को विभाजित कर के बनाया गया है.इसकी राजधानी रांची है.रांची के अतिरिक्त जमशेदपुर, धनबाद तथा बोकारो जैसे औद्योगिक केन्द्रों के कारण इसे अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली हुई है.
इस राज्य में 24 जिले हैं . यह आदिवासी बहुल राज्य है.सबसे बड़ा त्योहार सरहुल है जो मुख्यतः बसंतोत्सव है .छऊ प्रसिद्द लोक नृत्य है.
पूरे भारत देश में वनों के अनुपात में यह प्रदेश एक अग्रणी राज्य माना जाता है तथा वन्यजीवों के संरक्षण के लिये मशहूर है.

Reference-http://jharkhand.nic.in/
वैद्यनाथधाम -

द्वादश ज्योतिर्लिंग [भाग-2]-सोमनाथ & केदारनाथ

महाशिवरात्रि पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ..


जैसा की पिछली पोस्ट में बताया गया था कि भारत देश में बारह ज्योतिर्लिंग हैं.
इनके नाम इस प्रकार हैं-
(1) सोमनाथ, (2) मल्लिकार्जुन, (3) महाकालेश्वर, (4) ओंकारेश्वर (5) वैद्यनाथ, (6) भीमशंकर, (7) रामेश्वर,
(8) नागेश्वर, (9) विश्वनाथजी, (10) त्र्यम्बकेश्वर, (11) केदारनाथ, (12) घृष्णेश्वर[घुश्मेश्वर].
***इनमें से 3 महाराष्ट्र राज्य में[त्रयम्बकेश्वर,भीमशंकर,घुश्मेश्वर,] ही हैं,
गुजरात में 2[सोमनाथ,नागेश्वर] , तमिलनाडु के 1-रामेश्वरम में मौजूद [रामलिंगेश्वर],उत्तर में एक[केदारनाथ ],उत्तर प्रदेश में एक[विश्वनाथ],आंध्रा प्रदेश में एक[श्रीशैलम-मल्लिकार्जुन महादेव] ,झारखंड के देवघर नामक स्थान में 1[वैद्यनाथ]और मध्य प्रदेश में दो ज्योतिर्लिंग[महाकालेश्वर &ओंकारेश्वर] हैं.

आईए सब से पहले 'सोमनाथ 'के दर्शन के लिए चलते हैं-

द्वादश ज्योतिर्लिंग [भाग-१]

महाशिवरात्रि पर्व की ढेरों शुभकामनाएँ..
भारत देश की यही खूबी है कि यहाँ सभी पर्व धूमधाम से मनाए जाते हैं.
भोले भंडारी भगवान शिव की परम भक्त हूँ इसलिए इच्छा हुई कि भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लींगों की पावन यात्रा
आज से आरंभ की जाए .
इस यात्रा को शुरू करने से पहले जान लें कि आख़िर भगवान शिव की आराधना करते क्यों हैं?शिवलिंग क्या है?

शिव भारतीय धर्म, संस्कृति, दर्शन ज्ञान को संजीवनी प्रदान करने वाले हैं. इसी कारण अनादि काल से भारतीय धर्म साधना में निराकार रूप में शिवलिंग की व साकार रूप में शिवमूर्ति की पूजा होती है. शिवलिंग को सृष्टि की सर्वव्यापकता का प्रतीक माना जाता है. भारत में भगवान शिव के अनेक ज्योतिलिंग सोमनाथ, विश्वनाथ, त्र्यम्बकेश्वर, वैधनाथस नागेश्वर, रामेश्वर हैं.ये देश के विभिन्न हिस्सों उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम में स्थित हैं, जो महादेव की व्यापकता को प्रकट करते हैं शिव को उदार ह्रदय अर्थात् भोले भंडारी कहा जाता है।
कहते हैं ये थोङी सी पूजा-अर्चना से ही प्रसन्न हो जाते हैं। अतः इनके भक्तों की संख्या भारत ही नहीं विदेशों तक फैली है। भगवान शिव का महामृत्जुंजय मंत्र पृथ्वी के प्रत्येक प्राणी को दीर्घायु, समृद्धि, शांति, सुख प्रदान करता रहा है और चिरकाल तक करता रहेगा.