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द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-6]-महाकालेश्वर

‘ ऊँ महाकाल महाकाय , महाकाल जगत्पते। महाकाल महायोगिन् ‌ महाकाल नमोऽस्तुते॥ - महाकाल स्त्रोत(महाकाय, जगत्पति, महायोगी महाकाल को नमन) ...

द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-9]- त्रयम्बकेश्वर

jyotirlingsholk
त्रयम्बकेश्वर-:
Tryambakeshwar Temple, NasikTryambakeshwar Temple
द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक'त्रयम्बकेश्वर 'महाराष्ट्र के नासिक में है.
नाशिक शहर से ४० कि.मी दूर एक छोटे से कस्बे त्रयम्बकेश्वर में ,गोदावरी नदी के किनारे भगवान शंकर का यह ज्योतिर्लिंग है.भक्ति और आस्था के इस पावन स्थल में [धार्मिक मान्यता के अनुसार] काल सर्प योग के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए लोग दूर दूर से यहाँ आते हैं.

गोदावरी नदी का उद्गम स्थल
ब्रह्म गिरि नामक पर्वत से गोदावरी नदी का उद्गम स्थल भी यहीं है .
गौतम ऋषि तथा गोदावरी के प्रार्थना करने पर भगवान शिव ने इस स्थान में वास करने की कृपा की और त्र्यम्बकेश्वर नाम से विख्यात हुए.इस मंदिर के अंदर एक छोटे से गङ्ढे में तीन छोटे-छोटे लिंग है, ब्रह्मा, विष्णु और शिव- इन तीनों देवों के प्रतीक माने जाते हैं.सफेद संगमरमर से निर्मित इस शिवलिंग का नाम त्रयम्बकेश्वर महादेव है.ज्ञात हो कि यह तीन देवों का प्रतीक एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग एक.इसलिए इस की महत्ता बहुत अधिक है.
Tryambakeshwar Temple History
[त्रयम्बकेश्वरस्थल न केवल गोदावरी नदी का उद्गम स्थल है परन्तु भगवन गणेश का जन्मस्थान[?],त्रि-संध्या गायत्री,गोरखनाथ ,श्रद्धा ceremony मनाने का स्थान भी है.]
Tryambakeshwar Temple, enter
त्रयम्बकेश्वर मन्दिर काले पत्थरों से बना बेहद अद्भुत कला का नमूना है.इस का पुनर्निर्माण तीसरे पेशवा बालाजी [नाना साहब पेशवा]ने १५ वि शताब्दी में करवाया था।
कुशावर्त तीर्थ
कुशावर्त तीर्थ-:
एक कथा के अनुसार ब्रह्मगिरि पर्वत से गोदावरी के पलायन को रोकने के लिए गौतम ऋषि ने एक कुशा की मदद लेकर गोदावरी को बंधन में बाँध दिया था ,उसके बाद से ही इस कुंड में हमेशा लबालब पानी रहता है. इस कुंड को ही कुशावर्त तीर्थ के नाम से जाना जाता है.कुंभ स्नान के समय शैव अखाड़े इसी कुंड में शाही स्नान करते हैं.
Trayambakeshwar Jyothirlingaत्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग

चित्र में गौर से देखिये तो आप को आर्घा के अंदर एक-एक इंच के तीन लिंग दिखाई देंगे . इन लिंगों को त्रिदेव- ब्रह्मा-विष्णु और महेश का अवतार माना जाता है.

भोर के समय होने वाली पूजा के बाद इस आर्घा पर चाँदी का पंचमुखी मुकुट चढ़ा दिया जाता है.

कैसे जाएँ-
नासिक जाने के लिए आप पूरे देश में मुख्य शहरों से रेल, सड़क और वायु मार्ग से जा सकते हैं. नासिक पहुँचकर वहाँ से त्र्यंबक के लिए बस, ऑटो या टैक्सी ले सकते हैं.

कहाँ ठहरें-
सरकारी और गैर सरकारी आवास किराये पर उपलब्ध हैं.
अधिक जानकारी के लिए नासिक की अधिकारिक साईट देखें.
http://nashik.nic.in/
[Thanks Shri Raghavan for sharing these pictures]
References-Wikipedia and few other related websites

7 comments:

डॉ. मनोज मिश्र said...

बेहतरीन प्रस्तुति,कुछ नई जानकारी मिली ,धन्यवाद

Roshani said...

acchi jankari alpana ji.
Thank u so much.

शुभम जैन said...

bahut hi sundar jankari...bahut achcha laga ye bharat darshan...
dhanywaad...

[aur haan buzz se aapne profile delete kar li jaan kar thoda bura laga mujhe :( ...mera ek follower kam ho gya :):) ]

ज्योति सिंह said...

alpana ji sawan me 2 saal pahle gayi rahi yahan darshan karne bahut hi shaandaar jagah hai iski yaad aaj bhi taaza hai dil me ,yah apne aap me anokha shivling hai bhole baba ka .jai shivshankar ki jai .har har mahadev ji .

P.N. Subramanian said...

सुन्दर जानकारी.

Mrs. Asha Joglekar said...

maine abhee tak tryambakeshwar dekha nahee hai . par aapke sath ghoom bhi liye aur jankari bhee hasil kar lee. dhanyawad.

omprakash said...

sundar jankai is se devdaesan ko jane walo ko madad milegi

omprakash bohra