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द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-6]-महाकालेश्वर

‘ ऊँ महाकाल महाकाय , महाकाल जगत्पते। महाकाल महायोगिन् ‌ महाकाल नमोऽस्तुते॥ - महाकाल स्त्रोत(महाकाय, जगत्पति, महायोगी महाकाल को नमन) ...

द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-१० ]- घुश्मेश्वर/घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग

द्वादश ज्योतिर्लिंग में अब तक हम ने ९ ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किये.अप्रैल २००९ , के बाद आज मैं इस की अगली कड़ी प्रस्तुत कर पा रही हूँ.प्रयास रहेगा कि जल्द ही यह श्रृंखला पूरी कर सकूँ.
jyotirlingsholk
घुश्मेश्वर/घृष्णेश्वर  ज्योतिर्लिंग –[महाराष्ट्र ]
महाराष्ट्र के मनमाड से 100 किमी दूर दौलताबाद स्टेशन से लगभग ११ किमी की दूरी पर वेरुल गांव में स्थित हैं.विश्व प्रसिद्ध एलोरा की गुफाएं भी पास में ही स्थित हैं.

१६ वि शताब्दी में इस मंदिर को छत्रपति शिवाजी  के दादाजी मालोजी राजे भोंसले ने पुनरनिर्माण था और महारानी अहिल्याबाई होलकर ने अपने समय में इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था .
जैसा कि हर ज्योतिर्लिंग के साथ कोई न कोई कहने जुडी है वैसे ही इस के साथ भी एक प्राचीन कथा प्रसिद्ध है .कहते हैं कि दक्षिण देश में देवगिरिपर्वत के निकट सुधर्मा नामक एक एक शिव भक्त ब्राह्मण अपनी पत्नी सुदेहा के साथ  रहा करता था .उसके कोई संतान नहीं थी .पत्नी सुदेहा के दवाब में उस ने संतान प्राप्ति हेतु उसकी छोटी बहन घुश्मा से दूसरी शादी कर ली.घुश्मा शिव की अनन्य भक्त थी .वह रोज़ एक शिवलिंग बनाती पूजा करती और मंदिर के सरोवर में उसे विसर्जित कर देती . घुश्मा को जल्द ही एक पुत्र की प्राप्ति हुई. ब्राह्मण पुजारी की पहली पत्नी ने ईर्ष्यावश इस पुत्र की हत्या कर दी और उसके शव को ले जाकर उसने उसी तालाब में फेंक दिया जिसमें घुश्मा प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंगों को विसर्जित करती थी.
घुश्मा ने अपने पुत्र के शोक में भी शिव भक्ति नहीं छोड़ी ,उसकी भक्ति से प्रसन्न हो कर शिव भगवान ने उसके पुत्र को जीवनदान दिया .घुश्मा की प्रार्थना स्वीकार कर शिव जी उसी सरोवर के पास ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर  वहीं निवास करने लगे.तब से देव सरोवर के पास स्थित इस ज्योतिर्लिंग को घुश्मेश्वर के नाम से पुकारा जाना लगा.
 Grishneshwar Jyotirlinga (Aurangabad)  Ghrishneshwar
 grineshwar
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घुश्मेश्वर/घृष्णेश्वर  ज्योतिर्लिंग –[राजस्थान ] बहुत से मानने वाले यह कहते हैं कि महाराष्ट्र का घुमेश्वर ज्योतिर्लिंग मूल नहीं है .राजस्थान राज्य में  शिवार /शिवाड में ही मूल ज्योतिर्लिंग स्थापित है. वे इसकी पुष्टि शिव पुराण में दिए गए तथ्यों से करते हैं .जिस देवगिरी पर्वत का वर्णन शिवपुराण में है वह महाराष्ट्र में नहीं है.
पुराण में वर्णित तालाब शिवालय के नाम से  शिवार के मंदिर के पास अब भी है जाह्न एक खुदाई के दौरान कई शिवलिंग पाए गए [जिन्हें कथा के अनुसार घुश्मा पूजा के बाद सरोवर में फेंक दिया करती थी.]जबकि महाराष्ट्र वाले घुमेश्वर मंदिर के पास बने कुंड में कोई शिवलिंग नहीं मिला.
शिव पुराण के अनुसार घुश्मा नामक जिस स्त्री के पुत्र को शिव जी ने जीवन दान दिया था.वह शिवर में रहने वाली स्त्री थी.यह भी कहा जाता है कि उस घुश्मा के वंशज आज भी शिवार  में रहते हैं.

मंदिर की अधिकारिक वेबसाइट पर आप इस विषय में अन्य जानकारियां भी ले सकते हैं.


Official Website-http://www.ghushmeshwar.org/
इस साईट के अनुसार-
Regarding to historical facts in Berul there is no such evidence of presence of Shivalaya.
Hence it is now well known that the Shivalaya at Shiwar is the only twelfth Jyotirling of India not at Berul village.
This well famous temple of Shiwar has certification of archaeological truths, Shankaracharyas , Mahamandelshwars and saints’ opinions.
1.Honored Shri Jagatguru Shankaracharya, Shri Swami Swaroopanand Saraswati Jyotirmath Badrikashram Mahalaya.
2. Nandnandanad Sarswati Religion unity educationist Varanasi.
3. Mahamandelshwar Manav Uthan Mandaladhipati Saint Shri Kantacharya ji Maharaj, Dharma Dhan , Gomati Tat,Silhore, Barabanki , UP
4.Shri Shankar Giri ji Sanyasi, Nepal
5.Shri Swami Premchaityany ji maharaj, Mandhata.
6.Shri 108 swami Shri Krishnanand ji Maharaj.
7.Shri Ratnachandra ji Agrawal , Director Archaeology & Museum.
8. Shri Swami Raghavanand Saraswati ji maharaj.
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आईये आप को इस के भी दर्शन कराते चलें.शिवरात्रि पर यहाँ हजारों श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं .

यह स्थान सवाई माधोपुर-जयपुर रेलवे रूट पर 'शिवार  शहर 'में स्थित है .

अब इन दोनों में मूल ज्योतिर्लिंग कौन सा है यह आप ही बताएँ.हमने आप को दोनों के ही दर्शन करा दिए हैं.
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13 comments:

यशवन्त said...

रोचक जानकारी!

आपका ये ब्लॉग जानकारियों का खजाना है.

सादर

क्रिएटिव मंच-Creative Manch said...

बहुत अच्छी जानकारी मिली .
राजस्थान वाले ज्योतिर्लिंग के बारे में पहली बार सुना है.
आभार.

Vijai Mathur said...

मूल बात तो यह है कि आप पर्यटन के लिहाज़ से उपयुक्त जानकारी दे रही हैं ;विवाद तो हमारे यहाँ पग-पग पर होते हैं,वे महत्वपूर्ण नहीं हैं.द्वादश ज्योतिर्लिंग १२ राशियों का प्रितिनिधित्व करते हैं -यह भी एक तथ्य है

Mukesh Kumar Sinha said...

alpana jee, bahut dino baad aapka blog dekha,............aap busy hain kya!!

achchha laga jyotirling ka darshan karna!!

waise mera ghar bhi Deoghar me hai.........(baidyanathdham, 12th jyotirlinga..........in jharkhand)

नीरज जाट जी said...

शिवरात्रि तो बहुत दूर है। हमने तो आज ही दर्शन कर लिये।
विवाद तो वैसे हर मन्दिर के साथ होते हैं कि ये मूल है, वो मूल नहीं है।
यही हाल 52 शक्तिपीठों का भी है।

आशीष मिश्रा said...

बहोत ही अच्छी जानकारी

आभार

कई दिनों बाद आपके ब्लॉग पर नयी पोस्ट देखकर खुशी हुई .

सादर

SR Bharti said...

आपका ब्लॉग जानकारियों का खजाना है.

सादर

Alpana Verma said...

त्रुटि सुधार दी है.
धन्यवाद दीपक जी

Alpana Verma said...

त्रुटि सुधार दी है.
धन्यवाद दीपक जी

Unknown said...

ये महत्वपूर्ण जानकारी लोगों को देने के लिए धन्यबाद। दरअसल घुश्मेश्वर जयितिर्लिंग के बारे में शास्त्रों में विवाद होने के कारण दोनों जगह महाराष्ट्र और राजस्थान में स्थित दोनों शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंग का दर्जा प्राप्त है। ऐसे ही गुजरात में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में विवाद है कि असल ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में अल्मोड़ा के पास जागेश्वर धाम ज्योतिर्लिंग में स्थित है। शास्त्रो के अनुसार दोनों को ही ज्योतिर्लिंग का दर्जा प्राप्त है। ऐसा ही मध्य प्रदेश में ओम्कारेश्वर ममलेश्वर के बारे में है। दोनों को ही ज्योतिर्लिंग का दर्जा प्राप्त है। भोलेनाथ की कृपा से इन सभी स्थानों के दर्शन का सौभाग्य मुझे प्राप्त हो चुका है। कुछ भी हो आप भोलेनाथ के शक्तिपीठ के दर्शन तो कर ही लेंगे। जय भोलेनाथ

Ganeshvar Rajput said...

ये महत्वपूर्ण जानकारी लोगों को देने के लिए धन्यबाद। दरअसल घुश्मेश्वर जयितिर्लिंग के बारे में शास्त्रों में विवाद होने के कारण दोनों जगह महाराष्ट्र और राजस्थान में स्थित दोनों शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंग का दर्जा प्राप्त है। ऐसे ही गुजरात में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में विवाद है कि असल ज्योतिर्लिंग उत्तराखंड में अल्मोड़ा के पास जागेश्वर धाम ज्योतिर्लिंग में स्थित है। शास्त्रो के अनुसार दोनों को ही ज्योतिर्लिंग का दर्जा प्राप्त है। ऐसा ही मध्य प्रदेश में ओम्कारेश्वर ममलेश्वर के बारे में है। दोनों को ही ज्योतिर्लिंग का दर्जा प्राप्त है। भोलेनाथ की कृपा से इन सभी स्थानों के दर्शन का सौभाग्य मुझे प्राप्त हो चुका है। कुछ भी हो आप भोलेनाथ के शक्तिपीठ के दर्शन तो कर ही लेंगे। जय भोलेनाथ

Alpana Verma अल्पना वर्मा said...

बहुत -बहुत धन्यवाद आपका इस ज्ञानवर्धक जानकारी देने के लिए .
आभार,

सादर
अल्पना

Kumud Jain said...

शिवाड़ का ज्योतिर्लिंग ही शिव पुराण की कथा के अनुसार सत्य प्रतीत होता है । इसके प्रमाण जो दिये गये है वो सभी सत्य है ।
https://ghushmeshwar.com/proof-of-12th-jyotirlinga/