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छत्तीसगढ़ का खजुराहो

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शेख चिल्ली का मक़बरा

पिछली पोस्ट में मैं ने आप को हरयाणा राज्य के बारे में जानकारी दी थी.आज आप को उसी राज्य के एक पर्यटक स्थल के बारे में बताती हूँ.अंतरजाल पर इस स्थान के बारे मेी बहुत ही कम जानकारी उपलब्ध है.आईए देखते हैं कुछ चित्र और जानते है कुछ बातें इस स्थल के बारे में-:
शेख चिल्ली का मक़बरा-
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शेख चिल्ली का नाम सुनते ही शेखी बघारने वाले किसी व्यक्ति का ध्यान आ जाता है.क्योंकि अक्सर किसी गप्पेबज़ ,और झूटी शेखी बघारने वाले को शेख चिल्ली कह दिया जाता है..मगर हाँ यहाँ किसी ऐसे शेख चिल्ली की बात नहीं कर रहे.
यह शेख चिल्ली तो तो एक बड़े सूफी संत थे.
यह मकबरा हरयाणा के थानेसर जिले में है और भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है.
schilli2मुख्य द्वार पर लगे सरकारी पटल के अनुसार शेख चिल्ली का नाम अब्दुर रहीम उर्फ़ अब्दुल करीम उर्फ़ अब्दुर रजाक बताया जाता है.मुग़ल राजकुमार दारा शिकोह [१६५०] द्वारा यह इमारत बनवाई गयी थी.[इस इमारत को किस ने बनवाया था इस में बहुत से इतिहासकारों में मतभेद हैं]

शेख चिल्ली उनके आध्यात्मिक गुरु थे और उन के जीते जी दारा शिकोह ने यह इमारत बनवाई जहाँ वह महीनो अपने गुरु के पास रहा कर शिक्षा लिया करते थे.शेख चिल्ली कि मृत्यु के बाद उन्हें इसी इमारत के नीचे तहखाने में दफना दिया गया था और यह इमारत शेख चिल्ली के मकबरे के नाम से मशहूर हो गयी.
shkhchillimakbara मुख्य इमारत ताजमहल की तरह संगमरमर से बनी है और ऊपर एक गुम्बद भी दिखता हैschilli6बीच में बना लॉन हरा भरा और बेहद खूबसूरत है.तहखाने में ६ कब्र हैं जिन में से शेख चिल्ली कि एक है और बाकि पांच किस की हैं इस बारे में कहीं उल्लेख नहीं है.
एक सूखा तलाब भी यहाँ दिखता है जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कभी यहाँ पानी लेने के लिए नहर का भी इंतजाम रहा होगा.
इमारत में नौ मेहराबें हैं और बारह छतरियां हैं.इमारत पर की गयी कलाकारी पर्शियन प्रभाव की लगती है.
अपनी अनूठी और सुन्दर वास्तुकला के लिए इस इमारत को ताजमहल के बाद दूसरा स्थान दिया जाता है.मकबरे के पश्चिम में पुरातत्व विभाव को खुदाई में राजा हर्ष के टीले के अवशेष मिले हैं.
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एक स्थान पर मैं ने यह भी पढ़ा है कि यह भी माना जाता है कि सूफी संत शेख चिल्ली ने ही भारत में सबसे पहले मुग़ल शासन की समाप्ति की भविष्यवाणी की थी और उन्होंने दारा शिकोह को सलाह दी थी कि जो भी काम करने हैं अपने जीवन में कर लो...और इसीलिए दारा शिकोह ने अपने उस्ताद के जीवित रहते ही उनके इस मकबरे का निर्माण करवा दिया था!
यह स्थान छात्रों में भी लोकप्रिय है क्योंकि पढने के लिए बहुत ही शांत जगह है.
इस स्थान को देखने के लिए टिकट लगता है.
सप्ताह में हर दिन सुबह ९ से शाम ५ बजे तक खुल रहता है.[कन्फर्म कर लें]
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Reference -http://archaeologyharyana.nic.in/
18 December शुक्रवार से शुरू होने वाले नये इस्लामिक साल के लिए मुस्लिम भाईयों और बहनो को ढेर सारी शुभकामनाएँ.

8 comments:

अजय कुमार झा said...

वाह जी वाह ..कमाल की जानकारी है अब तक शेखचिल्ली के किस्से ही सुने थे आज आपकी पोस्ट से उनके मकबरे के बारे में भी जान लिया ..बहुत ही जानकारीपूर्ण और रुचिकर लेख

विनोद कुमार पांडेय said...

शेखचिल्ली जी के बारें में सुना था ..आज उनसे संबंधित इमारतों को देख कर बहुत अच्छा लगा..बढ़िया प्रस्तुति..आभार

बुझो तो जाने said...

Wakai thathyo se awgat karata ek gyanwardhak lekh woh bhi shakchilli ke bare me. Aapka aabhar.

शमीम said...

Apke blog par aane ka pehli baar mauka mila. uprokta lekh padha .rochak aur jankari se yukta hai yeh lekh . Shubhkamnay....

Parasmani said...

शुक्रिया. तस्वीरें बहोत अच्च्छी हैं. दारा शिकोह के गुरु होने के नाते शेख चिल्ली एक आदरणीय व्यक्ति हैं.

आशीष मिश्रा said...

बहोत ही अच्छी जानकारी दी है आपने

इससे पहले इस स्थान का नाम भी नहीं सूना था

बहोत बहोत धन्यवाद

Gautam MALIK said...

achi jagh hai jaa k ana cahiye main to jaa ayay ap ki barri hai

Gautam MALIK said...

good mam main jaa k ayaay bhout achi jagh hai