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शहर जबलपुर का मदन महल


dhuandhaaar waterfalls

lord shiv statue
आज हम मध्यप्रदेश के एक खूबसूरत शहर और वहां की संस्कारधानी कहलाये जाने वाले शहर जबलपुर के बारे मे कुछ जानने की  कोशिश  करेंगे.

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से 330 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है प्राचीन शहर जबलपुर। इस शहर को जबालिपुरम भी कहते हैं क्योंकि इसका सम्बन्ध महर्षि जाबालि से जोड़ा जाता है।रामायण एवं महाभारत की कथाएँ इस शहर से जुड़ी हुई हैं।


'बावन तालों का सुन्दर नगर 'जबलपुर , मनोहारी प्राकृतिक सुन्दरता की वजह से 12शताब्दी में गोंड राजाओं की राजधानी रहा, उसके बाद कालाचूडी राज्य के हाथ रहा और अन्तत: इसे मराठाओं ने जीत लिया और तब तक उनके पास रहा जब तक कि ब्रिटिशर्स ने 1817 में उनसे ले न लिया।


गोंडवाना क्षेत्र-
घने जंगलों का क्षेत्र, गोंडवाना अब मध्यप्रदेश का अंग है। पर एक जमाने में यह देश से अलग-थलग था और बाकी देश पर जो कुछ बीता उससे यह बहुत कुछ अछूता रहा। तथापि उत्तर के सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव से यह नहीं बच सका।
अनेक ऋषि-मुनियों ने यहाँ अपने आश्रम बनाये, क्योंकि यहाँ एकान्त भजन-पूजन के लिए बहुत उपयुक्त था। कभी यहाँ रानी दुर्गावती शासन करती थीं।



-रानी दुर्गावती -


गोंडवाना साम्राज्य के गढ़ा-मंडला सहित ५२ गढ़ों की शासक वीरांगना रानी दुर्गावती कालिंजर के चंदेल राजा कीर्तिसिंह की इकलौती संतान थी। उनका जनम 1524 A.D में हुआ था.


गोंडवाना शासक संग्राम सिंह के पुत्र दलपत शाह की सुन्दरता, वीरता और साहस की चर्चा धीरे धीरे दुर्गावती तक पहुँची परन्तु जाति भेद आड़े आ गया . फ़िर भी दुर्गावती और दलपत शाह दोनों के परस्पर आकर्षण ने अंततः उन्हें परिणय सूत्र में बाँध ही दिया.
सन् 1542 में अपने विवाह के उपरान्त दलपतशाह को जब अपनी पैतृक राजधानी गढ़ा रुचिकर नहीं लगी तो उन्होंने सिंगौरगढ़ को राजधानी बनाया और वहाँ प्रासाद, जलाशय आदि विकसित कराये.
रानीदुर्गावती से विवाह होने के ४ वर्ष उपरांत ही दलपतशाह की मृत्यु हो गई और उनके ३ वर्षीय पुत्र वीरनारायण को उत्तराधिकारी घोषित किया गया.


रानी ने सन् 1555 से 1560 तक मालवा के सुल्तान बाजबहादुर तथा मियाना अफगानों के आक्रमणों को विफल किया। अकबर ने उसके दरबार में गोप कवि को भेजकर, दुर्गावती के दीवान आधार सिंह कायस्थ (आधारताल का निर्माता) को अपनी और मिलाने का कूटनीतिक प्रयास किया पर उसमें असफल रहा।


अंतिम युध्द जबलपुर की मंडला की सीमा पर नर्रई नाला पर 23 जून 1564 को हुआ। नाले में बाढ़ आ जाने से रानी सुरक्षित स्थान पर नहीं जा सकी। रात्रि में धोखे से आक्रमण कर आसफ खां ने रानी को कपटपूर्वक पराजित किया। परन्तु वीर रानी ने अपने हाथ से ही अपना प्राणांत कर,अपने शील व स्वाभिमान की रक्षा की।
इस तरह रानी ने साहस और पराक्रम के साथ 1546 से 1564 तक गोंडवाना साम्राज्य का कुशल संचालन किया। इन्हीं के नाम पर जबलपुर में एक विश्वविद्यालय का नाम रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय रखा गया है.
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संतुलित शिला

प्रागैतिहासिक पृथ्वी के संरचना के समय पहाड़ों में मदन महल की पहाड़ियाँ और चट्टानें गौड़ वान ट्रैक के नाम से जानी जाती हैं पुरातत्व शास्त्रियों के अनुसार यह सरंचना हिमालय से भी पुरानी है।
संतुलित शिला का इस गौड़्वाना ट्रैक में होना खुद इस बात क प्रमाण है कि यह क्षेत्र करोड़ों वर्ष पुराना है। दो पत्थरों के बीच लाखों वर्षों तक पानी और हवा के बहाव से पैदा हुए कटाव द्वारा संतुलित शिला का निर्माण होता है।खास बात यहाँ की यह शिला भूकंप में भी नहीं हिली।
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मदन महल


-मदन महल-

यह कब बना? इस के बारे में कुछ भी साफ़ साफ़ नहीं कहा जा सकता है. अधिकतर सूत्रों के अनुसार यह किला राजा मदन शाह ने १११६ में बनवाया था.
ज़मीन से लगभग ५०० मीटर की ऊँचाई पर बने इस 'मदन महल 'की पहाड़ी 150 करोड़ वर्ष पुरानी मानी जाती है | इसी पहाड़ी पर गौंड़ राजा मदन शाह द्वारा एक चौकी बनवायी गई ।इस किले की ईमारत को सेना अवलोकन पोस्ट के रूप में भी इस्तमाल किया जाता रहा होगा.
इस इमारत की बनावट में अनेक छोटे-छोटे कमरों को देख कर ऐसा प्रतीत होता है कि
यहाँ रहने वाले शासक के साथ सेना भी रहती होगी. शायद इस भवन में दो खण्ड थे। इसमें एक आंगन था और अब आंगन के केवल दो ओर कमरे बचे हैं। छत की छपाई में सुन्दर चित्रकारी है। यह छत फलक युक्त वर्गाकार स्तम्भों पर आश्रित है। माना जाता है ,इस महल में कई गुप्त सुरंगे भी हैं जो जबलपुर के 1000 AD में बने '६४ योगिनी 'मंदिर से जोड़ती हैं.
यह दसवें गोंड राजा मदन शाह का आराम गृह भी माना जाता है. यह अत्यन्त साधारण भवन है। परन्तु उस समय इस राज्य कि वैभवता बहुत थी. खजाना मुग़ल शासकों ने लूट लिया था.
गढ़ा-मंडला में आज भी एक दोहा प्रचलित है -


मदन महल की छाँव में, दो टोंगों के बीच .
जमा गड़ी नौं लाख की, दो सोने की ईंट.
इस महल के बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं मिली-जो भी मिल सकी यहाँ प्रस्तुत की गई है. घटनाओं के काल में भी कई स्थान पर भिन्नता देखी गयी है.यहाँ दी गयी सभी जानकारी अंतरजाल पर पहले से प्रस्तुत सामग्री के आधार पर है.यह भवन अब भारतीय पुरातत्व संस्थान की देख रेख में है.
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विकिपीडिया से प्राप्त यह जानकारी के अनुसार इस शहर का नाम कई प्रसिद्द व्यक्तियों से जुड़ा है जिन में से कुछ नाम निम्नलिखित हैं-
  • श्री पंडित भवानी प्रसाद तिवारी
  • हरिशंकर परसाई
  • महर्षि महेश योगी
  • सुभद्रा कुमारी चौहान
  • पं. द्वारका प्रसाद मिश्र, पूर्व मुख्य मंत्री, मध्य प्रदेश
  • आचार्य रजनीश ( ओशो)
  • प्रोफेसर महावीर सरन जैन
  • मणिशंकर विश्वकर्मा
  • बृजेश मिश्र
  • भूपेंद्र नाथ कौशिक "फ़िक्र"
  • प्रेमनाथ[हिंदी फिल्म अभिनेता ]
  • राजिंदर नाथ[हिंदी फिल्म अभिनेता ]

-कैसे जाएँ -- 
जबलपुर एयरपोर्ट मध्यप्रदेश और पडोसी राज्यों के अनेक शहरों से वायुमार्ग द्वारा जुड़ा है। यह रेलवे स्टेशन भारत के प्रमुख शहरों से रेलमार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।
-राज्य परिवहन की बसें सभी मुख्य शहरों से जबलपुर के लिए चलती हैं एवम ठहरने के लिये होटल सभी स्तर के उपलब्ध हैं.
references-
http://orbat.com/site/cimh/kings_master/kings/durgavati/durgavati.html and wikipedia.



9 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

जरुरी जानकारी मिली है,

चैतन्य शर्मा said...

अच्छी जानकारी ....अच्छे फोटो

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

जबलपुर के बारे में बहुत अच्छी जानकारी दी आपने.

सादर

Vijai Mathur said...

रानी दुर्गावती की वीरता ,साहस और जबलपुर की ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त हुयी.

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत अच्छा लगा आपके ब्लॉग में आके ... एक जानकारी पूर्ण तथा रोचक ब्लॉग है ... आगे से आता रहूँगा ...

Maheshwari Kaneri said...

अच्छा लगा आपके ब्लॉग में आके बहुत अच्छी जानकारी दी आपने.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

आपका स्वागत है "नयी पुरानी हलचल" पर...यहाँ आपके ब्लॉग की कल होगी हलचल...
नयी-पुरानी हलचल

anupama's sukrity ! said...

इतनी सुंदर जानकारी देकर अपना इतिहास जीवित कर रहीं हैं आप ...!!
आभार ..!!

संगीता पुरी said...

बहुत अच्‍छी जानकारी !!