आप को लिए चलते हैं दूर...भारत के केन्द्र शासित प्रदेश में जो लगभग छोटे बडे ५७२ द्वीपों का एक समूह है और उत्तर से दक्षिण की ओर विस्तार में लगभग 800 किलोमीटर की दूरी में फैला है -जी हाँ ,यह है अंडमान और निकोबार द्वीप समूह.
हिंद महासागर में स्थित इस द्वीप का नाम भगवान् हनुमान के नाम का परिवर्तित रूप है.[क्योंकि अंदमान मलय भाषा के हन्दुमान शब्द से आया माना जाता है].इस प्रदेश की राजधानी पोर्ट ब्लयेर है.इस प्रदेश के सुन्दर साफ़ समुद्री तट ,और प्राकृतिक सुन्दरता देखते ही बनती है.इस प्रदेश की अधिकारिक साईट पर इसे धरती पर स्वर्ग कहा गया है.
यूँ तो अंतरजाल में इस जगह के बारे में बहुत अधिक जानकारी है इस लिए प्रयास किया है कि संक्षेप में मगर अधिक से अधिक जानकारी दे सकूँ.२६ दिसंबर २००४ को सुनामी लहरों के कहर का यहां सर्वाधिक असर समुद्र तल से कम ऊंचाई वाले सपाट क्षेत्र को झेलना पड़ा था, जिनमें लिटिल अंडमान का निकोबार ग्रेट निकोबार सहित कई अन्य द्वीप शामिल हैं।
पर्यटकों के लिए विशेष अधिकारिक सूचना--
१-विदेशियों को यहाँ घूमने और रहने के लिए इंडियन मिशन ओवरसीज़ के दफ्तर से अनुमति लेनी होती है .
२-भारतियों को अंडमान घुमने के लिए अनुमति नहीं चाहिये मगर निकोबार और कुछ आदिवासी इलाकों पर घूमने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होगी. अनुमति हेतु जारी निर्धारित एक आवेदन पत्र Deputy Commissioner, Andaman District, Port Blair. को दाखिल करना होता है.
3-'बैरन द्वीप 'पर किसी को भी उतरने की अनुमति नहीं है वह जहाज़ में बैठे ही देखना होगा.
४-किसी भी राष्ट्रिय पार्क में बिना अनुमति दाखिल न हों.
५-किसी भी स्थान की विडियो या फोटो लेने से पहले अगर अनुमति लेनी आवश्यक है तो जरुर लें.
६-संरक्षित वनों के आस पास आग न जलाएं.
७- आदिवासी इलाकों के आस पास फोटो न खींचें.
अंडमान कैसे पहुँचें?
निकटतम हवाई अड्डा --चेन्नई, कोलकाता,
जल मार्ग - चेन्नई ,कोलकाता तथा विशाखा पटनम से जहाज उपलब्ध [50-60 hrs journey]
अंडमान एवं निकोबार में कब जायें?
- वर्षपर्यंत
[यह द्वीप समूह १८ वीं शताब्दी के शुरू तक बाकी दुनिया से कटा रहा. पहले ब्रितानी उसके बाद जापानियों ने यहाँ अपने कदम जमाने की कोशिश की. पुर्तगाली भी कभी यहाँ रहे होंगे क्योंकि निकोबारियों की भाषा में पुर्तगाली भाषा के शब्द मिलते हैं.]
अंडमान में कहाँ ठहरें?
समस्त सुविधाओं से युक्त कमरे वाले डीलक्स पाँच सितारे होटलों से लेकर मध्यम श्रेणी वाले होटलों तथा गेस्ट हाउसों की श्रृंखला उपलब्ध है .
निकोबार में देखने की जगहें-
[यह जगह विदेशियों के लिए प्रतिबंधित है मगर भारतियों को घूमने के लिए विशेष अनुमति चाहिये.]
निकोबार २८ द्वीपों का समूह है.
यहाँ -कत्चल ,कार निकोबार,ग्रेट निकोबार द्वीप देख सकते हैं.
-ग्रेट निकोबार में मगपोदे एक दुर्लभ पक्षी देखा जा सकता है.यहाँ 'इंदिरा पॉइंट को भारत का दक्षिणी छोर माना जाता है. [अब तक हम सब कन्याकुमारी को दक्षिणी छोर मानते आये हैं ]
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अंडमान में पोर्ट ब्लेयर और उस के आस पास की देखने लायक जगहें -
-महात्मा गाँधी मैरीन नेशनल पार्क ,-ऐतिहासिक सेल्यूलर कारागार,-गाँधी पार्क -सिप्पिघाटी फार्म -चिडिया टापू . इन के अलावा कोल्लिनपुर , मधुबन ,माउंट हर्रिएत ,मिनी चिडियाघर ,मरीना पार्क, अंडमान वाटर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स, फिशरीज म्यूजियम, समुद्रिका म्यूजियम, एंथ्रोपोलॉजिकल म्यूजियम, फॉरेस्ट म्यूजियम आदि।
कार्बिन कोव्स बीच,डिगलीपुर, रॉस द्वीप,वाइपर द्वीप,सिंक व रेडस्किन द्वीप भी देखने लायक जगहें हैं ,
बैरन द्वीप का ज्वालामुखी, भारत का एकमात्र सक्रिय है ज्वालामुखी है। -अंडमान में वॉटर स्पोर्ट्स , वॉटर स्कीइंग, सेलिंग, विंड सर्फिंग और स्नोरकेलिंग के मजे ले सकते हैं , इनके लिए पोर्ट ब्लेयर में बना अंडमान वॉटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सब से अच्छा है . अगर आप स्कूबा ड्राइविंग करना चाहते हैं , तो हेवलॉक में राधानगर बीच इसके लिए अच्छी जगह है.
पर्यटन विभाग की तरफ से साल के दिसम्बर और जनवरी के महीने में यहाँ फेस्टिवल आयोजित होते हैं. सुभाष मेला ,विवेकानंद मेला - ब्लाक मेला - भी जनवरी के महीने में आयोजित होते हैं
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अब बात करते हैं ऐतिहासिक सेल्यूलर कारागार की-
यह जेल अंडमान -निकोबार द्वीप की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में बनी हुई है.काला पानी के नाम से कुख्यात यह जेल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों को कैद रखने के लिए अंग्रेजों ने बनाई गई थी. इस का निर्माण कार्य १९०६ में पूरा हुआ. सात इमारतें [जो तीन मंजिला थीं ] को मिला कर यह जेल बनी.
इन भवनों के केंद्र में एक टावर था. और ६९४ कोठरियां थीं. वर्तमान में सिर्फ तीन ही इमारतें शेष हैं. कारागार की दीवारों पर शहीदों के नाम लिखे हैं. यहाँ लाइट एंड साऊंड शो में यह इतिहास चलचित्र द्वारा बताया जाता है. शहीद वीर सावरकर को यहाँ १९११ में लाया गया था ..वह यहाँ करीब १० साल तक रहे. अंग्रेजों द्वारा इन कैदियों से बहुत ही बुरा वर्ताव किया जाता था. कोडे लगाना,आम बात थी. कोल्हू चलवाना , बंजर ज़मीन जोतवाना आदि कठिन कार्य करवाए जाते थे. उनके जुल्मों की कहानी यह इमारतें अपने भीतर छुपाये हुए हैं. दुसरे विश्व युद्ध के बाद जापानियों ने अंडमान पर कब्ज़ा किया तब ३० दिसम्बर १९४३ को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने यहाँ कैदियों से मुलाक़ात की और भारतीय झंडा फहराया. यहीं एक संग्रहालय भी है जहाँ अंग्रेजों के शस्त्र, सुभाष जी के दौरे की तस्वीरें आदि सुरक्षित हैं. सुभाष जी [नेता जी] की याद में यहाँ हर साल जनवरी में एक मेले का भी आयोजन होता है.
इस सेल्यूलर कारागार की अधिकारिक साईट यहाँ है.
-:अल्पना
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5 comments:
Hi this is very good info about andaman island
amiT
HI THE INFORMARMATION IS ACTULY ROMANTIC & VERY INTRESTNG......THANKS FOR INFORMATION
FROM
MAHENDRA PRAJAPATI
BARODA.GUJARAT INDIA
YE JANKARI SIRF THEARICAL HAI AGAR USSE BHI JYADA PICTURE KE SATH HOTA TO AUR INTRESTING RAHETA.
I would like to visit in the month February 10 to 18 th instant.
Bhaskar ji.Thanks .Do share your views ,experience and pics od Andmaan nikobaar here .
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