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द्वादश ज्योतिर्लिंग -[भाग-6]-महाकालेश्वर

‘ ऊँ महाकाल महाकाय , महाकाल जगत्पते। महाकाल महायोगिन् ‌ महाकाल नमोऽस्तुते॥ - महाकाल स्त्रोत(महाकाय, जगत्पति, महायोगी महाकाल को नमन) ...

त्रिपुरा



त्रिपुरा

प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद आकर्षक पर्यटक स्थल है त्रिपुरा!
भौगोलिक क्षेत्र 10,49,169 हेक्‍टेयर और 27,57,205 [ 1991 Census के अनुसार ] जनसँख्या वाला यह राज्य भारत का दूसरा सब से छोटा राज्य है.सुदूर उत्तर पूर्व में स्थित ७ राज्यों में से एक राज्य है.इस छोटे से राज्य उत्तरी,दक्षिणी,और पश्चिमी सीमायें बंगला देश की सीमा से जुडी हैं.इस कि पूर्वी सीमा भारत के मिजोरम और आसाम राज्यों की सीमा से जुडी है.त्रिपुरा बांग्‍लादेश तथा म्‍यांमार की नदी घाटियों के बीच स्थित है. यहाँ मुख्यत बंगला और काकबोरक भाषाएँ बोली जाती हैं.
इस राज्य की अधितकतर आबादी गावों में रहती है और कृषि ही उनका मुख्य व्यवसाय है.

अगरतला इस राज्य की राजधानी है.[यह बंगला देश से मात्र २ किलोमीटर दूर है.]
१८३८ में राजा कृष्ण किशोर ने अगरतला को त्रिपुरा की राजधानी बनाया था.

इस राज्य में केवल चार ही जिले हैं.

१-धलाई जिला,२ उत्तरी त्रिपुरा ३-जिला,दक्षिण त्रिपुरा जिला,४-पश्चिम त्रिपुरा जिला.


त्रिपुरा का नाम कैसे पड़ा?

इस बारे में विभिन्न मत हैं-
१-स्थानीय भाषा में 'तुइपारा ' का अर्थ है पानी से जुडा हुआ.कहते हैं पहले यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ था.इसी वजह से इस का नाम त्रिपुरा पड़ा हो?

२-ऐसा भी कहा जाता है कि राजा त्रिपुर, जो ययाति वंश का 39 वाँ राजा था के नाम पर इस राज्य का नाम त्रिपुरा पड़ा.

३-एक मत के अनुसार स्थानीय देवी त्रिपुर सुन्दरी [त्रिपुरेश्वरी देवी]के नाम पर यहाँ का नाम त्रिपुरा पड़ा . यह 51 शक्ति पीठों में से एक है.

४-कहते हैं पहेल यह जगह तीन जिलों [छात्ग्राम ,नोखाली और कुमिला ] से मिल कर बनी हुई थी इस लिए त्रि+पुर =त्रिपुरा ' कहने लगे.

जानिए त्रिपुरा के इतिहास को-

त्रिपुरा को प्राचीन काल में किराटभूमि कहते थे और इसकी राजधानी त्रिबेग थी.हजारों साल पहले इस का नाम त्रिपुरा पड़ा.ऐसा माना जाता है कि त्रिपुरा का इतिहास बहुत पुराना है.महाभारत,अशोक के शिला लेखों और पुराणों में भी इस के बारे में लिखा मिलता है.राजमाला के अनुसार त्रिपुरा के शासकों को ‘फा’ उपनाम से पुकारा जाता था जिसका अर्थ ‘पिता’ होता है.त्रिपुरा नरेश के बारे में ‘राजमाला’ गाथाओं तथा मुसलमान इतिहासकारों के वर्णनों से जाना जा सकता है.कई युद्धों में त्रिपुरा के शासकों ने बंगाल के सुल्‍तानों कों हराया था.

19 वि शताब्दी में राजा वीर चन्द्र बहादुर [माणिक्य राजवंश]ने अपने राज्य का शासन ब्रिटिश भारत की तर्ज पर चलाया.इस तरह उनके शासनकाल में त्रिपुरा में नए युग की शुरुआत हुई.
महाराजा की मृत्यु के बाद- चूँकि उनके बेटे 'किरीट बिक्रम किशोर 'बहुत छोटे थे इस लिए महाराजा की पत्नी महारानी कंचन प्रभा देवी ने राजगद्दी संभाली.
यूँ तो भारत की आज़ादी के बाद तत्कालीन महारानी ने ९ सितम्बर ,१९४७ को त्रिपुरा के भारत संघ में शामिल होने के लिए लिखित सहमती दे दी थी.
लेकिन १५ अक्टूबर , 1949 को ही त्रिपुरा को भारत संघ ने अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल किया.तब तक वहां महारानी द्वारा स्वतंत्र राज्य किया जाता रहा.वर्त्तमान में 'महाराजा प्रद्योत बिक्रम माणिक्य' इस राजवंश से हैं..
1956 में राज्‍यों के पुनर्गठन के बाद यह केंद्रशासित प्रदेश बना.राज्य का दर्जा १९७२ में ही मिला.


प्रमुख लोकनृत्य होज़ागिरी,मैमिता.बीजू,लुसाई ,वान्गाला आदि हैं.
नोबल पुरुस्कार विजेता ठाकुर रबिन्द्र नाथ टैगोर भी इस राज्य से बहुत लम्बे समय तक जुड़े थे.प्रसिद्द फिल्म संगीतकार राहुल देव बर्मन और सचिन देव बर्मन भी इसी राज्य से हैं.

हथकरघा उद्योग-

बांस से बना सामान यहाँ की विशेषता है.

त्यौहार और उत्सव-
रविन्द्र जयंती,गरिस गजन उत्सव,खारची उत्सव ,मानस मंगल.नौका दौड़,पौस संक्रांति मेला आदि मुख्य पर्व मनाये जाते हैं.

त्रिपुरा में दर्शनीय स्थल -१-अगरतला -[त्रिपुरी लोग इसे अगुली भी कहते हैं]

यहाँ प्रमुख आकर्षण केन्द्र



  • उज्जयांता पैलेस-

    त्रिपुरा के राजवंश के पूर्व निवास स्थान इस उज्जयंता महल को सरकार द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में करने के बाद सरकारी धरोहर घोषित कर दिया गया.पिछले कुछ वर्षों से यह खाली था इस लिए अब यहाँ राज्य विधान सभा की बैठकें की जाती हैं और यह प्रतिबंधित क्षेत्र है.शान ३ बजे से चार बजे के बीच अगर आप मुख्य द्वार से जाएँ तो आप पास ले सकते हैं और घूम सकते हैं[इस जानकारी की पुष्टि कर लिजीये.] शाम के समय यहाँ बहुत ही सुन्दर रोशनी की जाती है जिसे पर्यटक देखने आते हैं.

    १८६२ में shahar से कुछ दूर बना बना शाही आवास जब १८९८ में बुरी तरह से नष्ट हो गया तब शहर के बीच में यह दो मंजिला महल महाराजा राधा किशोर मानिक ने १८९९-१९०१ में बनवाया था.इस के वास्तुकार श्री अलेक्सान्दर मार्टिन थे.इस पर उस समय १० लाख रुपयों से कुछ ऊपर की लागत आई थी.यह ८०० एकड़ क्षेत्रफल में फैला है.महल में खूबसूरत टाइल, लकड़ी का अधिकतर काम और दरवाजों पर खूबसूरत हस्तकला की गई है. इस महल को विशाल मुगल गार्डन की शैली में तैयार किया गया है. उज्जयंता महल की वास्तुकला में ग्रीक,मुग़ल, और रोमन वास्तुकला का प्रभाव दिखाई देता है.यह काफी आकर्षक है. इसके अतिरिक्त महल में तीन ऊंचे गुम्बद है.

    महल के मैदान में नारंगी रंग के दो मंदिर अर्थात् उम्मेनश्वर मंदिर और जगन्नाथ मंदिर स्थित है, जिनमें कोई भी व्यक्ति दर्शानार्थ जा सकता है.
    कुछ ही समय पहले संगीत पर नाचते फव्वारे यहाँ लगवाए गए हैं जो बहुत ही खूबसूरत हैं.


  • राज्य म्यूजियम -
    राज्य म्यूजियम में एथनोग्राफिकल और आर्कियोलॉजी संबंधी वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं. यह सोमवार से शनिवार तक प्रात: 10 से सायं 5 बजे तक खुलता है, इसमें प्रवेश निशुल्क है।

  • जनजातीय संग्रहालय-[पर्यटन कार्यालय के पीछे स्थित यह ट्राइबल म्यूजियम त्रिपुरा के 19 आदिवासी समूहों की स्मृति के रूप में बनाया गया है].

  • इन के अलावा चर्च , सुकान्ता एकेडमी, एम.बी.बी. कॉलेज, लक्ष्मीनारायाण मंदिर, उमा महेश्‍वर मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, वेणुबन विहार नामक एक बौद्ध मंदिर , गेदू मियां मस्जिद[जो अनोखे tareeke से क्राकरी के टूटे हुए टुकड़ों से बनी है], मलांच निवास, रविन्द्र कनान, पुरबाशा, हस्तशिप केन्द्र,

  • चतुर्दश देवता मंदिर -पुराना अगरतला पूर्व में 5 कि.मी. दूर है. यहां यह चौदह मूर्तियों वाला मंदिर है जहां जुलाई माह में श्रद्धालु कड़छी-पूजा के लिए एकत्र होते हैं. यहां आटोरिक्शा, बस और जीप द्वारा पहुंचा जा सकता है].

  • अन्य दर्शनीय स्थल-




    1. पीलक-


    2. उदयपुर [राजस्थान राज्य के उदयपुर की तरह इस उदयपुर को भी त्रिपुरा में झीलों का शहर कहते हैं।]


    3. त्रिपुरेश्वरी मंदिर[त्रिपुरा सुंदरी मंदिर ] -

      त्रिपुरा सुंदरी माता को ५१ शक्तिपीठों में एक माना गया है.साधना ग्रन्थों में त्रिपुरा महाशक्ति को त्रिपुर सुन्दरी-त्रिपुर भैरवी नाम भी दिये गये हैं.त्रिपुरा के तीन मुख-तीन आयामी सृष्टि, त्रिगुण, त्रिकाल के प्रतीक हैं . चार हाथों में त्रिशूल से त्रिताप नाश का,फल से श्रेष्ठ परिणाम प्राप्ति का कमण्डलु से पात्रता का और आशीर्वाद मुद्रा से दिव्य अनुदान का बोध होता है.यह मंदिर तलवाडा ग्राम से 5 किलोमीटर दूर स्थित है , यहाँ सिंह पर सवार भगवती अष्टादश भुजा की मूर्ति स्थित हैं,मूर्ति की भुजाओं में १८ प्रकार के आयुध हैं.मंदिर में खण्डित मूर्तियों का संग्रहालय भी बना हुआ हैं जिनकी शिल्पकला बेजोड़ है.

    4. नीरमहल [राजस्थान के जलमहल के जैसा यह त्रिपुरा का जलमहल है.]

    5. भुवनेश्वरी मंदिर

    6. सेफाजाला
      सेफाजाला

    7. कमल सागर

    8. देओतमुरा-deotamura

    9. दम्बूर झील-

    दम्बूर झील
    10-जामपुई हिल -


      जामपुई हिल

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      unakoti

      12-
      Akhura checkpost

      13-

      Rose Valley aqua-park At Amtali

      कब जाएँ-सबसे अच्छा मौसम-अक्टूबर से मार्च तक है.

      कैसे पहुंचें?-

      वायु मार्ग - निकटतम हवाई अड्डा अगरतला है,कल्कोत्ता,दिल्ली और गुवाहाटी से सीधी विमान सेवाएं हैं.
      सड़क मार्ग- कलकत्ता, धर्मनगर, गोवाहटी, सिलचर आदि से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है.
      रेल मार्ग -सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन धर्मनगर और कुमार घाट हैं.
      वहां घूमने जाने से पहले राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और स्थिति पर एक बार नज़र डाल लें और सम्बंधित दफ्तर से परामर्श कर लें.
      Aayeeye dekhen--'Neer Mahal'--Video Clip
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      References-
      http://tripura.nic.in/
      http://hotelcitycentre.co.in

    4 comments:

    पी.सी.गोदियाल said...

    सुन्दर जानकारी, तस्वीरो को अगर क्लिक कर बड़ा करने की सुविधा होती तो और भी उत्तम होता !

    Alpana said...

    Sir,
    Kuchh tasveeron par click kar ke bada dekh sakte hain,
    tasveeren jaldi load ho saken is liye unhen resize kiya tha.
    agli baar aap ke sujhaav par amal hoga.

    dhnywaad.

    क्रिएटिव मंच said...

    bahut sundar likhi gayi post.
    paryatakon ke liye achhi jaankari


    *********************************
    प्रत्येक बुधवार सुबह 9.00 बजे बनिए
    चैम्पियन C.M. Quiz में |
    प्रत्येक रविवार सुबह 9.00 बजे शामिल
    होईये ठहाका एक्सप्रेस में |
    *********************************
    क्रियेटिव मंच

    दिलीप कवठेकर said...

    बडा ही सुखद आश्चर्य हुआ आपके इस नये , और जानकारी ्तथा चित्रों से से भरपूर ब्लोग को पढकर...

    अति उत्तम प्रयास. ये सही लिखा है, ये मात्र जानकारे के लिये है.

    इसे बढाईये आगे, यही शु्भकामनायें .