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चंडीगढ़-- 'रॉक गार्डन'



चंडीगढ़-भारत देश में चंडीगढ़ एकमात्र एक ऐसा शहर[union territory] है जो दो राज्यों की राजधानी है.एक राज्य पंजाब है,दूसरा हरयाणा [ज्ञात हो कि-हरयाणा नया राज्य १९६६ में ,पूर्वी पंजाब के हिस्से से बना था.

“The seed of Chandigarh is well sown. It is for the citizens to see that the tree flourishes”.-Mon Le Corbusier[Architect of Chandigarh]
'Open hand Monument ' की तस्वीर. जो की चंडीगढ़ की अधिकारिक सील पर भी अंकित है.यह Monument फुटबॉल ग्राउंड में स्थित है

open hand monument

आईये जानते हैं इस शहर के बारे में कुछ और-
आज़ादी के बाद १९४७ में पंजाब की राजधानी कौन सी हो जब इस पर विचार हुआ तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु ने एक नए सुन्दर शहर की कल्पना की जिसे इस राज्य की राजधानी बनाया जा सके.
इस कल्पना को रूप देने के लिए उन्होंने फ्रेंच नगर नियोजक तथा वास्तुकार ली कार्बूजि़यर को योजना बनाने को कहा.ऐसा सुना जाता है की सब से पहले इस नगर का मास्टर प्लान अमेरिकी आर्किटेक्ट अलबर्ट मेयर को दिया गया था जो पोलैंड आकिर्टेक्ट mathew नोविसकी के साथ काम कर रहे थे.
le corbusier with chandigarh plan
मगर नोविसकी की असामयिक मृत्यु के बाद यह प्लान १९५० में 'ली कार्बूजि़यर के जिम्मे आ गया.
शिवालिक पहाडियों से घिरा यह स्थान चंडी मंदिर के पास होने के कारण चंडीगढ़ पड़ा.जिस का अर्थ है,चंडी देवी का घर. इस शहर की नींव १९५२ में रखी गयी थी.
चंडीगढ़ में १से ४७ सेक्टर हैं.१३ नंबर का कोई सेक्टर नहीं बनाया गया.क्योंकि १३ को अशुभ अंक माना जाता है.
Sector एक में कैपिटल काम्प्लेक्स हैं.
सेक्टर १७ में सिटी सेंटर.
सिटी सेंटर

भारत की सबसे अच्छी ,सुन्दर और योजनाबद्ध बनाई गयी सिटी कहलाती है.
सेक्टर १०,११,१२,१४,२६ में शैक्षिक और सांस्कृतिक institue हैं.
सेक्टर ३४ नया व्यवसायिक केंद्र है.

यहाँ आवासीय और व्यवसायिक केन्द्रों को अलग अलग रखा गया है.बहतु से पार्कों का निर्माण शहर को हरा भरा और सुन्दर बनाने के लिए किया गया है.सडकों का निर्माण वी-७ प्लान के अंतर्गत किया है.और अधिक विस्तृत जानकारी शहर की अधिकारिक साईट से ले सकते हैं.
इस शहर को बनाने का एक और कारण था वह यह कि जो लोग विभाजन के समय विस्थापित हो गए थे उन्हें पुनर्स्थापित करना.
जब मैं चंडीगढ़ पहली बार गयी तब सब से ज्यादा आश्चर्य मुझे यह देख कर हुआ कि वहां मैंने कोई भिखारी नहीं देखा..न ही रेलवे स्टेशन पर न ही बस स्टेशन आदि पर.

चंडीगढ़ की कुछ ख़ास बातें-

-१-यहाँ सेक्टर १३ नहीं है.
२-यह शहर २००७ में धूम्रपान रहित क्षेत्र घोषित हो गया था.
३-२००८ से यहाँ प्लास्टिक के बैग आदि के इस्तमाल पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया है.
४-यहाँ किसी भी पार्क में किसी भी तरह की मूर्ति लगाना मना है.
५-झीलों का प्राकृतिक स्वरूप बनाये रखने के लिए इन का किसी भी प्रकार का व्यवसायिक उपयोग प्रतिबंधित है.
6-चंडीगढ़ को भारत के सब से अमीर शहरों में एक माना जाता है.

पर्यटन -

यहाँ बहुत से सुन्दर बाग हैं ,इनमें कुछ मुख्य ये हैं -

१-रोज़ गार्डन[गुलाबों का बाग़ ]
रोज़ गार्डन

२- बोगेनविलिया गार्डन.

३-जापानीस गार्डन

४-टोपिअरी पार्क

५-terrace गार्डन

६-कैक्टस गार्डन [पंचकुला]
कैक्टस गार्डन

७-सुखना झील पार्क.


८-राजेन्द्र पार्क

९-बम्बू घाटी

१०-नेक चन्द का रॉक गार्डन .

११-पिंजोर या मुग़ल गार्डन
पिंजोर गार्डन

इस के अलावा यहाँ आप देख सकते हैं-

-
सुखना वन्यजीव अभ्यारण्य ,यहाँ का संग्रहालय आदि.

अब जानते हैं रॉक गार्डन के बारे में थोडा विस्तार से-

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नेक चंद का रॉक गार्डन-

यह चंडीगढ़ के सेक्टर एक में बना हुआ है.इस का निर्माण श्री नेक चंद सैनी ने किया है.२५ Acre में फैले इस पार्क में हजारों मूर्तियाँ हैं.
१९८४ को श्री नेक चन्द को कला क्षत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत सरकार ने पदमश्री के सम्मान से नवाजा था.
लेकिन यहाँ तक का सफ़र उन्होंने कैसे तय किया आईये यह भी जान लें-
जब चंडीगढ़ के निर्माण का कार्य शुरू हुआ तब नेक चन्द को १९५१ में सड़क निरीक्षक के पद पर रखा गया था.
नेक चन्द ड्यूटी के बाद अपनी सायकिल उठाते और शहर बनाने के लिए आस पास के खाली कराये गए गाँवों में से टूटे फूटे सामान को उठा लाते.सारा सामान उन्होंने PWD के स्टोर के पास इकट्ठा करना शुरू किया और धीरे धीरे अपनी कल्पना के अनुसार इन बेकार पड़ी वस्तुओं को रूप देना शुरू किया.अपने शौक के लिए छोटा सा गार्डन बनाया और धीरे धीरे उन्होंने इस का विस्तार करते गए.उन्हें इस कलाकारी की कोई ओपचारिक शिक्षा नहीं थी.
यह स्थान जंगल जैसा था जिसे वह साफ़ करते और बगीचे का रूप देते गए.इस पर काफी समय तक किसी की निगाह नहीं पड़ी.अकेले वह यह सब ड्यूटी के बाद चुपके से किया करते थे.
इस तरह से सरकारी जगह का उपयोग एक तरह से अवैध कब्जा ही था इस लिए इस पर सरकारी गाज गिरने का डर हमेशा बना रखता.
एक दिन १९७२ में जंगल साफ़ कराते समय इस बाग़ पर उनके उच्च अधिकारी की निगाह पड़ ही गयी.
मगर उन्होंने नेक चंद के इस अद्भुत कार्य को सराहा और उनके इस पार्क १९७६ में जनता को समर्पित कर दिया गया.सरकार की तरफ से इस पार्क का उन्हें sub-divisional मेनेजर बना दिया गया.
१९८३-८४ में यह भारतीय डाक टिकेट पर भी अपनी जगह बना सका.
सरकार ने नेक चंद को recyclable मटेरिअल इकट्ठा करने में मदद की और पार्क की maintenance के लिए उन्हें ५० मजदूर भी दिए.
यहाँ इस गार्डन में सभी कलाकृतियाँ ,मूर्तियाँ आदि बेकार सामान के इस्तमाल से बनाई गयी हैं और उनका ऐसा सुरुचिपूर्ण इस्तमाल देख कर कोई भी आर्श्चय चकित रह सकता है.यहाँपानी का एक कृत्रिम झरना भी है .



-यह पार्क बहुत बड़ा है और इस में घूमते घूमते हम भी थक गए थे.
अनुमान है की यहाँ रोजाना ५,००० विसिटर आते हैं.
नेक चन्द की kalakrityon का सब अधिक संग्रह भारत के बाद अमेरिका में है.विदेशों में कई जगह उनकी कला का प्रदर्शन किया जा चुका है.
दुःख की बात यह है कि इस पार्क को अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए बहुत जद्दोजहद करनी पड़ी है कुछ साल पहले यहाँ पर फिर गाज गिरी जब सरकारी आदेश पर बुलडोज़र इस निर्माण को गिराने आ पहुंचे.तब यहाँ के स्थानीय निवासियों ने मानव श्रृंखला बना कर इसे टूटने से बचाया.१९८९ में अदालत ने जब फैसला नेक चन्द के पक्ष में दिया तब इस पार्क को चाहने वालों की जान में जान आई.आशा है ,चंडीगढ़ को दी गयी श्री नेक चंद की इस अद्भुत देन को यहाँ के लोग भविष्य में भी सुरक्षित रखेंगे.



कैसे जाएँ-
सभी मुख्य शहरों से यह शहर सड़क ,वायु,और रेल से जुडा हुआ है.यातायात बहुत सुगम है.
कब जाएँ---वर्षपर्यंत.
से जुड़े प्रसिद्द व्यक्ति ---नीरजा भनोत, जीव मिल्खा सिंह ,कपिलदेव, भारतीय क्रिकेटर
मिल्खा सिंह धावक ,बलबीर सिंह अंतर्राष्ट्रीय हाकी खिलाड़ी ,जी एस सरकारिया पंचकुला कैक्टस गार्डन के जन्मदाता ,नेकचंद, राक गार्डन के निर्माता 'युवराज सिंह, भारतीय क्रिकेटर ,सबीर भाटिया, हाटमेल के संस्थापक ]
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References-
1-http://chandigarhtourism.gov.in
2-http://www.clt.astate.edu/elind/nc_main.htm
3-http://www.chandigarh.nic.in/
-Alpana
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2 comments:

दिनेशराय द्विवेदी said...

अच्छी जानकारी! कहते हैं बहुत सुंदर नगर है। कभी जाने का अवसर नहीं मिला।

रक्षाबंधन पर शुभकामनाएँ!
विश्व-भ्रातृत्व विजयी हो!

Alka Ray said...

waah kya anokha garden hai
alpana didi aapne itni sundar post men pictures badi kyon nahi lagayi?
pictures me clear nahi dikhayi de raha hai