Featured Post

आज महाराणा प्रताप की जयंती पर चलिये कुम्भलगढ़

महाराणा प्रताप (९ मई, १५४०- १९ जनवरी, १५९७) उदयपुर, मेवाड में शिशोदिया राजवंश के राजा थे. हिंदू कलेंडर के अनुसार उनका जन्म ज्येष्ठ शुक...

दंतवाडा-‘छत्तीसगढ़'

chhattisgarh 'छत्तीसगढ़' ---यही वह राज्य है जहाँ से मैं समझती हूँ आज की तारीख में सब से अधिक हिंदी ब्लॉगर हैं. इस राज्य के बारे में जो कुछ भी यहाँ लिख रही हूँ उसमें अगर कहीं कोई त्रुटी दिखाई दे तो कृपया मुझे सूचित करीए.
छत्तीसगढ़ -जैसा की नाम ही इशारा करता है यह क्षेत्र ३६ गढ़ों का समूह रहा होगा इस लिए इस का नाम छत्तीसगढ़ पड़ा.

पौराणिक इतिहास-
कहते हैं कि राजा दशरथ की पत्नी कौशल्या के नाम पर इस क्षेत्र को कोसल कहा जाने लगा था.
माना यह भी जाता है कि भगवान् राम अपने वनवास के समय 'छत्तीसगढ़ ' से हो कर गुजरे थे और शबरी ने उन्हें बेर यहीं खिलाये थे.
महाभारत से भी जोड़ती कहानियां कुछ इतिहासकार बताते हैं..उनके अनुसार इतिहासकार बिलासपुर के पांडो, कोरवा और कंवर जनजातियों का सम्बन्ध पांडव और कौरवों से हो सकता है.
रायगढ़ के 'कबरा पहाड़' और सिंघनपुर की गुफ़ाओं में मिले भित्तिचित्र इस क्षेत्र में मानव जाती के विकास की कहानी सुनाते हैं.
यहाँ के प्राचीन मन्दिर तथा उनके भग्नावशेष यह बताते कि यहाँ पर वैष्णव, शैव, शाक्त, बौद्ध के साथ ही अनेकों आर्य तथा अनार्य संस्कृतियों का विभिन्न कालों में प्रभाव रहा होगा.
- इसके प्राचीनतम उल्लेख सन 639 ई० में प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्मवेनसांग के यात्रा विवरण में मिलते हैं. यात्रा विवरण में लिखा है कि दक्षिण-कौसल की राजधानी सिरपुर थी.
-कहते हैं-महाकवि कालिदास का जन्म भी छत्तीसगढ़ में हुआ था.
इतिहास से --
-1000 ई. में पहला कलचुरि राजा कलिंगराज कोसल पहुँचा ,उसके बेटे रत्नदेव ने अपने राज्य की राजधानी रत्नपुर में बनाई.कलचुरि शासन दो हिस्सों में बँटा था. एक शिवनाथ के उत्तर में और दूसरा शिवनाथ के दक्षिण में.. दोनों ओर 18 गढ़. जहाँ ये १८-18 प्रशासनिक इकाईयां बनीं.इस तरह कलचुरियों के 36 गढ़ थे जो 36garh के नामकरण का आधार बना.
- मुगलों और मराठों के शासन काल में बस्तर को 36garh शामिल हुआ.
-मराठे और कुछ समय तक अंग्रेज भी छत्तीसगढ़ का शासन नागपुर से सँभालते थे.बाद में अंग्रेजों में रायपुर को राजधानी बना दिया.
-अंग्रेजी हुकूमत के समय 1860 में मध्य प्रांत का गठन हुआ. नागपुर, महाकोसल और छत्तीसगढ़ को मिलाकर वे इसे 'सीपी एंड बरार 'कहते थे. इसमें छोटी-छोटी कुल 14 रियासतें थीं.
-१९४७ में आज़ादी के बाद १९५६ तक छत्तीसगढ़ महाकोसल का हिस्सा था.
-1956 में छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश का हिस्सा बना.
-छत्तीसगढ़ को अपनी पहचान बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी.खूबचंद बघेल [१९५६-६९ ] पवन दीवान, शंकर गुहा नियोगी ने [1977 से 1990 ]आन्दोलन चलाये.
-1994 में मध्यप्रदेश विधानसभा में छत्तीसगढ़ राज्य की मांग की गई और कुछ पार्टियों के लिए यह चुनावी मुद्दा बन गया.
और इस तरह लम्बे इंतज़ार के बाद पहली नवंबर 2000 से देश के नक्शे पर मध्य प्रदेश से कट कर 'छत्तीसगढ़ 'नाम का एक नया राज्य बन गया.
-----------------------------------------------------------------------
जानते हैं इस राज्य के बारे में--
छत्तीसगढ़ के उत्तर में सतपुड़ा, मध्य में महानदी और उसकी सहायक नदियों का मैदानी क्षेत्र और दक्षिण में बस्तर का पठार. राज्य की प्रमुख नदियाँ हैं - महानदी, शिवनाथ , खारुन पैरी और इन्द्रावती नदी.
मूल भाषा-छत्तीसगढ़ी ,
राजधानी-रायपुर
जिले-१६
यहाँ का लोक गीत-संगीत तो बहुत प्रसिद्द हैं.
कई जनजातियों वाला यह राज्य धान की भरपूर पैदावार के कारण धान का कटोरा भी कहलाता है.
भारत देश की १२% वनसंपदा यहीं है.राज्य का ४४% हिस्सा वनों से घिरा है.यहाँ २ राष्ट्रिय उद्यान,११ Wildlife Sanctuaries पर्यटकों का मुख्य आकर्षण हैं.
मेरी जानकारी में विद्युत उत्पादन और आपूर्ति में यह राज्य स्वयम में सक्षम है.
यह राज्य सभी राज्यों से सड़क,वायु,और रेल मार्ग से जुडा हुआ है.
छत्तीसगढ़ में बहुत कुछ है देखने के लिए.पुरानी गुफाएं,मंदिर,जल प्रपात आदि..हर जिले में कुछ न कुछ !

आज मैं आप को छत्तीसगढ़ में दक्षिण बस्तर क्षेत्र के एक जिले दंतवाडा ले कर चलती हूँ.यहाँ साल और टीक के जंगल तो है ही साथ ही पर्वत श्रृंखला भी प्रकृति की भेंट है. मुख्यत इन्द्रावती ,शाभारी,और गोदावरी नदियाँ इस क्षेत्र से बहती हैं.बरसूर ,दंतवाडा और भद्रकाली इतिहासिक महत्व के स्थान हैं.लोहे की खाने,पहाड़ी चोटियों के दृश्य,पार्क आदि भी देखने की जगहें हैं.कुछ दर्शनीय स्थल इस प्रकार हैं-
सूर्या मूर्ती बरसूर,विष्णु मूर्ती ,बड़ा गणेश ,गुरु बेताल ,मामा भांजा मंदिर ,शिव मंदिर बचेली,बत्तीसा मंदिर,इन्द्रावती नदी,बोद्धघाट सात धार,आदि.

akash-nagar kailash nagar

कैलाश नगर , आकाश नगर पहाड़ी पर बसे लोकप्रिय स्पॉट हैं.

'दंतवाडा में विश्व में सबसे अधीक iron -ore के desposits पाए गए हैं.
यहाँ की मिटटी में खनिज प्रचुर मात्रामें है .

danteshwari devi mandir dwardanteshwari-temple-history


यहाँ का मुख्य आकर्षण है माता दंतेश्वरी देवी का मंदिर-:
आज जानते हैं 'बस्तर 'की कुल देवी के दंतेश्वरी देवी के मंदिर के बारे में-:
सम्बंधित पौराणिक कथा-
कहा जाता है कि सती पार्वती ने अपने पिता द्वारा अपने पति, भगवान शिव का अपमान किए जाने पर हवन कुंड में कूदकर अपनी जान दे दी थी. भगवान शिव को आने में थोड़ी देर हो गई, तब तक उनकी अर्धांगिनी का शरीर जल चुका था. उन्होंने सती का शरीर आग से निकाला और तांडव नृत्य आरंभ कर दिया. अन्य देवतागण उनका नृत्य रोकना चाहते थे, अत: उन्होंने भगवान विष्णु से शिव को मनाने का आग्रह किया. भगवान विष्णु ने सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए और भगवान शिव ने नृत्य रोक दिया.
कहा जाता है कि डंकिनी-शंखनी नदी के तट पर परम दयालु माता सती का दांत वहां गिरा था और यह जगह एक शक्तिपीठ के रूप में प्रतिष्ठित हो गया और दंतेश्वरी माता के रूप में देवी को यहाँ पूजा जाने लगा.

danteshwari_preview


इसी मंदिर से सम्बंधित बस्तर के राजा की एक कहानी और सुनिए--
बस्‍तर के राजा अन्‍नमदेव वारांगल, आंध्रप्रदेश से अपनी विजय के बाद बस्‍तर की ओर बढ रहे थे साथ में मॉं दंतेश्‍वरी का आशिर्वाद था . गढों पर कब्‍जा करते हुए बढते अन्‍नमदेव को माता दंतेश्‍वरी नें वरदान दिया था जब तक तुम पीछे मुड कर नहीं देखोगे, मैं तुम्‍हारे साथ रहूंगी . राजा अन्‍नमदेव बढते रहे, माता के पैरों की नूपूर की ध्‍वनि पीछे से आती रही, राजा का उत्‍साह बढता रहा .
शंखिनी-डंकिनी नदी के तट पर विजय मार्ग पर बढते राजा अन्‍नमदेव के कानों में नूपूर की ध्‍वनि आनी अचानक बंद हो गई . वारांगल से पूरे बस्‍तर में अपना राज्‍य स्‍थापित करने के समय तक महाप्रतापी राजा के कानों में गूंजती नूपूर ध्‍वनि के अचानक बंद हो जाने से राजा को वरदान की बात याद नही रही, राजा अन्‍नमदेव कौतूहलवश पीछे मुड कर देखा.
माता का पांव शंखिनी-डंकिनी के रेतों में किंचित फंस गया था! अन्‍नमदेव को माता नें साक्षात दर्शन दिये पर वह स्‍वप्‍न सा ही था . माता ने उनसे कहा 'अन्‍नमदेव तुमने पीछे मुड कर देखा है, अब मैं जाती हूं . बस वहीँ 'डंकिनी-शंखनी' के तट पर माता सती के दंतपाल के गिरने वाले उक्‍त स्‍थान पर ही जागृत शक्तिपीठ, बस्‍तर के राजा अन्‍नमदेव ने अपनी अधिष्‍ठात्री मॉं दंतेश्‍वरी का मंदिर बनवाया दिया .
------------------------
----ऐसा भी कहा जाता है कि यह नाम देवी का नया नाम है इनका पुराना नाम मानिकेश्वरी देवी था.

danteshwari-temple chhatarpur mandir

-यह मंदिर चार भागों में है-
गर्भ गृह,महा मंडप,मुख्य मंडप, और सभा मंडप..-पहले दो भाग पत्थर में बने हैं.
यह मंदिर भी कई बार बनवाया गया है और वर्तमान स्वरुप ८०० साल पुराना है.एक गरुड़ स्तम्भ भी मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने बाद में ही बनवाया गया था.
यहाँ का ५०० साल से चलता आ रहा बस्तर दशेहरा मेला बहुत ही प्रसिद्द है.एक लकडी के रथ पर माता की कैनोपी को रख कर यहाँ की tribes के लोग खींचते हैं.

cmandir bastar_dusshera_2

[Click picture to enlarge ]
---------------------
कैसे पहुंचे-
यह जगह जगदलपुर से डेढ़ घंटे कि दूरी पर है.
सबसे नज़दीक हवाई अड्डा -रायपुर का है.
विशाखापत्तनम से बैलाडाला जाती हुई रेल थोडी देर को इस स्टेशन पर रूकती है.
जगदलपुर सब से करीबी शहर है.
आंध्र प्रदेश से दंतवाडा के लिए नियमित बस सेवा है.
मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ के बड़े शहरों को जाती बसें भी यहाँ रुक कर जाती हैं.
--------------
कब जाएँ--वर्ष पर्यंत जब भी माता का बुलावा हो.
------------------------------------
आज के लिए इतना ही....अगली बार एक नयी जगह ले कर आप को चलेंगे,तब तक के लिए नमस्कार.

http://chhattisgarh.nic.in/

त्रिपुरा



त्रिपुरा

प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद आकर्षक पर्यटक स्थल है त्रिपुरा!
भौगोलिक क्षेत्र 10,49,169 हेक्‍टेयर और 27,57,205 [ 1991 Census के अनुसार ] जनसँख्या वाला यह राज्य भारत का दूसरा सब से छोटा राज्य है.सुदूर उत्तर पूर्व में स्थित ७ राज्यों में से एक राज्य है.इस छोटे से राज्य उत्तरी,दक्षिणी,और पश्चिमी सीमायें बंगला देश की सीमा से जुडी हैं.इस कि पूर्वी सीमा भारत के मिजोरम और आसाम राज्यों की सीमा से जुडी है.त्रिपुरा बांग्‍लादेश तथा म्‍यांमार की नदी घाटियों के बीच स्थित है. यहाँ मुख्यत बंगला और काकबोरक भाषाएँ बोली जाती हैं.
इस राज्य की अधितकतर आबादी गावों में रहती है और कृषि ही उनका मुख्य व्यवसाय है.

अगरतला इस राज्य की राजधानी है.[यह बंगला देश से मात्र २ किलोमीटर दूर है.]
१८३८ में राजा कृष्ण किशोर ने अगरतला को त्रिपुरा की राजधानी बनाया था.

इस राज्य में केवल चार ही जिले हैं.

१-धलाई जिला,२ उत्तरी त्रिपुरा ३-जिला,दक्षिण त्रिपुरा जिला,४-पश्चिम त्रिपुरा जिला.


त्रिपुरा का नाम कैसे पड़ा?

इस बारे में विभिन्न मत हैं-
१-स्थानीय भाषा में 'तुइपारा ' का अर्थ है पानी से जुडा हुआ.कहते हैं पहले यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी तक फैला हुआ था.इसी वजह से इस का नाम त्रिपुरा पड़ा हो?

२-ऐसा भी कहा जाता है कि राजा त्रिपुर, जो ययाति वंश का 39 वाँ राजा था के नाम पर इस राज्य का नाम त्रिपुरा पड़ा.

३-एक मत के अनुसार स्थानीय देवी त्रिपुर सुन्दरी [त्रिपुरेश्वरी देवी]के नाम पर यहाँ का नाम त्रिपुरा पड़ा . यह 51 शक्ति पीठों में से एक है.

४-कहते हैं पहेल यह जगह तीन जिलों [छात्ग्राम ,नोखाली और कुमिला ] से मिल कर बनी हुई थी इस लिए त्रि+पुर =त्रिपुरा ' कहने लगे.

जानिए त्रिपुरा के इतिहास को-

त्रिपुरा को प्राचीन काल में किराटभूमि कहते थे और इसकी राजधानी त्रिबेग थी.हजारों साल पहले इस का नाम त्रिपुरा पड़ा.ऐसा माना जाता है कि त्रिपुरा का इतिहास बहुत पुराना है.महाभारत,अशोक के शिला लेखों और पुराणों में भी इस के बारे में लिखा मिलता है.राजमाला के अनुसार त्रिपुरा के शासकों को ‘फा’ उपनाम से पुकारा जाता था जिसका अर्थ ‘पिता’ होता है.त्रिपुरा नरेश के बारे में ‘राजमाला’ गाथाओं तथा मुसलमान इतिहासकारों के वर्णनों से जाना जा सकता है.कई युद्धों में त्रिपुरा के शासकों ने बंगाल के सुल्‍तानों कों हराया था.

19 वि शताब्दी में राजा वीर चन्द्र बहादुर [माणिक्य राजवंश]ने अपने राज्य का शासन ब्रिटिश भारत की तर्ज पर चलाया.इस तरह उनके शासनकाल में त्रिपुरा में नए युग की शुरुआत हुई.
महाराजा की मृत्यु के बाद- चूँकि उनके बेटे 'किरीट बिक्रम किशोर 'बहुत छोटे थे इस लिए महाराजा की पत्नी महारानी कंचन प्रभा देवी ने राजगद्दी संभाली.
यूँ तो भारत की आज़ादी के बाद तत्कालीन महारानी ने ९ सितम्बर ,१९४७ को त्रिपुरा के भारत संघ में शामिल होने के लिए लिखित सहमती दे दी थी.
लेकिन १५ अक्टूबर , 1949 को ही त्रिपुरा को भारत संघ ने अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल किया.तब तक वहां महारानी द्वारा स्वतंत्र राज्य किया जाता रहा.वर्त्तमान में 'महाराजा प्रद्योत बिक्रम माणिक्य' इस राजवंश से हैं..
1956 में राज्‍यों के पुनर्गठन के बाद यह केंद्रशासित प्रदेश बना.राज्य का दर्जा १९७२ में ही मिला.


प्रमुख लोकनृत्य होज़ागिरी,मैमिता.बीजू,लुसाई ,वान्गाला आदि हैं.
नोबल पुरुस्कार विजेता ठाकुर रबिन्द्र नाथ टैगोर भी इस राज्य से बहुत लम्बे समय तक जुड़े थे.प्रसिद्द फिल्म संगीतकार राहुल देव बर्मन और सचिन देव बर्मन भी इसी राज्य से हैं.

हथकरघा उद्योग-

बांस से बना सामान यहाँ की विशेषता है.

त्यौहार और उत्सव-
रविन्द्र जयंती,गरिस गजन उत्सव,खारची उत्सव ,मानस मंगल.नौका दौड़,पौस संक्रांति मेला आदि मुख्य पर्व मनाये जाते हैं.

त्रिपुरा में दर्शनीय स्थल -१-अगरतला -[त्रिपुरी लोग इसे अगुली भी कहते हैं]

यहाँ प्रमुख आकर्षण केन्द्र



  • उज्जयांता पैलेस-

    त्रिपुरा के राजवंश के पूर्व निवास स्थान इस उज्जयंता महल को सरकार द्वारा अपने अधिकार क्षेत्र में करने के बाद सरकारी धरोहर घोषित कर दिया गया.पिछले कुछ वर्षों से यह खाली था इस लिए अब यहाँ राज्य विधान सभा की बैठकें की जाती हैं और यह प्रतिबंधित क्षेत्र है.शान ३ बजे से चार बजे के बीच अगर आप मुख्य द्वार से जाएँ तो आप पास ले सकते हैं और घूम सकते हैं[इस जानकारी की पुष्टि कर लिजीये.] शाम के समय यहाँ बहुत ही सुन्दर रोशनी की जाती है जिसे पर्यटक देखने आते हैं.

    १८६२ में shahar से कुछ दूर बना बना शाही आवास जब १८९८ में बुरी तरह से नष्ट हो गया तब शहर के बीच में यह दो मंजिला महल महाराजा राधा किशोर मानिक ने १८९९-१९०१ में बनवाया था.इस के वास्तुकार श्री अलेक्सान्दर मार्टिन थे.इस पर उस समय १० लाख रुपयों से कुछ ऊपर की लागत आई थी.यह ८०० एकड़ क्षेत्रफल में फैला है.महल में खूबसूरत टाइल, लकड़ी का अधिकतर काम और दरवाजों पर खूबसूरत हस्तकला की गई है. इस महल को विशाल मुगल गार्डन की शैली में तैयार किया गया है. उज्जयंता महल की वास्तुकला में ग्रीक,मुग़ल, और रोमन वास्तुकला का प्रभाव दिखाई देता है.यह काफी आकर्षक है. इसके अतिरिक्त महल में तीन ऊंचे गुम्बद है.

    महल के मैदान में नारंगी रंग के दो मंदिर अर्थात् उम्मेनश्वर मंदिर और जगन्नाथ मंदिर स्थित है, जिनमें कोई भी व्यक्ति दर्शानार्थ जा सकता है.
    कुछ ही समय पहले संगीत पर नाचते फव्वारे यहाँ लगवाए गए हैं जो बहुत ही खूबसूरत हैं.


  • राज्य म्यूजियम -
    राज्य म्यूजियम में एथनोग्राफिकल और आर्कियोलॉजी संबंधी वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं. यह सोमवार से शनिवार तक प्रात: 10 से सायं 5 बजे तक खुलता है, इसमें प्रवेश निशुल्क है।

  • जनजातीय संग्रहालय-[पर्यटन कार्यालय के पीछे स्थित यह ट्राइबल म्यूजियम त्रिपुरा के 19 आदिवासी समूहों की स्मृति के रूप में बनाया गया है].

  • इन के अलावा चर्च , सुकान्ता एकेडमी, एम.बी.बी. कॉलेज, लक्ष्मीनारायाण मंदिर, उमा महेश्‍वर मंदिर, जगन्नाथ मंदिर, वेणुबन विहार नामक एक बौद्ध मंदिर , गेदू मियां मस्जिद[जो अनोखे tareeke से क्राकरी के टूटे हुए टुकड़ों से बनी है], मलांच निवास, रविन्द्र कनान, पुरबाशा, हस्तशिप केन्द्र,

  • चतुर्दश देवता मंदिर -पुराना अगरतला पूर्व में 5 कि.मी. दूर है. यहां यह चौदह मूर्तियों वाला मंदिर है जहां जुलाई माह में श्रद्धालु कड़छी-पूजा के लिए एकत्र होते हैं. यहां आटोरिक्शा, बस और जीप द्वारा पहुंचा जा सकता है].

  • अन्य दर्शनीय स्थल-




    1. पीलक-


    2. उदयपुर [राजस्थान राज्य के उदयपुर की तरह इस उदयपुर को भी त्रिपुरा में झीलों का शहर कहते हैं।]


    3. त्रिपुरेश्वरी मंदिर[त्रिपुरा सुंदरी मंदिर ] -

      त्रिपुरा सुंदरी माता को ५१ शक्तिपीठों में एक माना गया है.साधना ग्रन्थों में त्रिपुरा महाशक्ति को त्रिपुर सुन्दरी-त्रिपुर भैरवी नाम भी दिये गये हैं.त्रिपुरा के तीन मुख-तीन आयामी सृष्टि, त्रिगुण, त्रिकाल के प्रतीक हैं . चार हाथों में त्रिशूल से त्रिताप नाश का,फल से श्रेष्ठ परिणाम प्राप्ति का कमण्डलु से पात्रता का और आशीर्वाद मुद्रा से दिव्य अनुदान का बोध होता है.यह मंदिर तलवाडा ग्राम से 5 किलोमीटर दूर स्थित है , यहाँ सिंह पर सवार भगवती अष्टादश भुजा की मूर्ति स्थित हैं,मूर्ति की भुजाओं में १८ प्रकार के आयुध हैं.मंदिर में खण्डित मूर्तियों का संग्रहालय भी बना हुआ हैं जिनकी शिल्पकला बेजोड़ है.

    4. नीरमहल [राजस्थान के जलमहल के जैसा यह त्रिपुरा का जलमहल है.]

    5. भुवनेश्वरी मंदिर

    6. सेफाजाला
      सेफाजाला

    7. कमल सागर

    8. देओतमुरा-deotamura

    9. दम्बूर झील-

    दम्बूर झील
    10-जामपुई हिल -


      जामपुई हिल

      11-unakoti
      unakoti

      12-
      Akhura checkpost

      13-

      Rose Valley aqua-park At Amtali

      कब जाएँ-सबसे अच्छा मौसम-अक्टूबर से मार्च तक है.

      कैसे पहुंचें?-

      वायु मार्ग - निकटतम हवाई अड्डा अगरतला है,कल्कोत्ता,दिल्ली और गुवाहाटी से सीधी विमान सेवाएं हैं.
      सड़क मार्ग- कलकत्ता, धर्मनगर, गोवाहटी, सिलचर आदि से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है.
      रेल मार्ग -सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन धर्मनगर और कुमार घाट हैं.
      वहां घूमने जाने से पहले राज्य की सुरक्षा व्यवस्था और स्थिति पर एक बार नज़र डाल लें और सम्बंधित दफ्तर से परामर्श कर लें.
      Aayeeye dekhen--'Neer Mahal'--Video Clip
      ---------------------------------------


      References-
      http://tripura.nic.in/
      http://hotelcitycentre.co.in

    मणिपुर और श्री श्री गोविंदाजी मंदिर

    'जन्‍माष्‍टमी की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं'
    मणिपुर
    ----------
    आईये चलें एक नए राज्य की सैर पर..यह राज्य है मणिपुर.
    Manipurयह राज्य भारत के पूर्वी सिरे पर स्थित है.इसके पूर्व में म्‍यांमार (बर्मा) और उत्तर में नागालैंड राज्‍य हैं , इसके पश्चिम में असम राज्‍य और दक्षिण में मिजोरम राज्‍य और म्‍यामांर हैं.कुल क्षेत्रफल 22,327 वर्ग किलो मीटर है.
    इस राज्य में जिले हैं.
    राजधानी इम्फाल’ है.भाषा मणिपुरी बोली जाती है. manipur-travel-map
    मणिपुर में भौतिक रूप से दो भाग हैं, १-पहाडियां और २-घाटी
    पहाडियों से घिरी मध्य भाग में घाटी है.पहाडियां राज्‍य के कुल क्षेत्रफल का लगभग 9/10 भाग घेरती हैं!यह पर्वतीय श्रृंखला उत्तर में ऊंची है और धीरे धीरे मणिपुर के दक्षिणी हिस्‍से में पहुंचने पर इसकी ऊंचाई कम हो जाती है.
    अधिकारिक site के अनुसार जनसंख्‍या 2,293,८९६ है.
    राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था का मुख्‍य आधार कृषि और संबद्ध गतिविधियां ही हैं लेकिन बढ़ती आबादी के कारण कृषि की हालत भी कमजोर है.
    राज्‍य में कृषि के बाद रोजगार की सबसे अधिक संख्‍या प्रदान करने वाला सबसे बड़ा कुटीर उद्योग हथकरघा उद्योग है.मणिपुरकी साडिया,शोलें बहुत प्रसिद्द हैं.हरथकरघा बुनाई का पारंपरिक कौशल यहां की महिलाओं के लिए न केवल आय का स्त्रोत और प्रतिष्‍ठा का प्रतीक है बल्कि यह उनके सामाजिक – आर्थिक जीवन का एक अविभाज्‍य अंग है.सीमा व्‍यापार को बढ़ावा देने के लिए सीमावर्ती शहर मोरेह में वेयरहाउस, सम्‍मेलन कक्ष और ठहरने की सुविधा के लिए एक केंद्र भी राज्य सरकार ने स्‍थापित किया गया है.
    प्राकृतिक संपदा से भरपूर-- Lilium mackliniae
    राज्य में घने और खुले वन है, जो राज्‍य के भौगोलिक क्षेत्र का 77.12 प्रतिशत है!
    मणिपुर के उखरूल जिले के शिराय गांव के वनो में स्‍वर्गपुष्‍प कहे जाने वाले शिराय लिली (लिलियम मैक्‍लीनी) फूल मिलते है, जो विश्‍व में किसी भी अन्‍य स्‍थान में नहीं होते.imphal valley
    इसी प्रकार जूको घाटी में दुलर्भ प्रजाति‍ के जूको लिली (लिलियम चित्रांगद) पाए जाते है। ज्ञात रहे कि मणिपुर अपनी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है. यहां कई तरह के दुर्लभ पेड़ पौधे और जीव-जंतु भी पाए जाते है.
    Loktak Lake
    Sangai यह ‘संगाई’ हिरण (सेरवस इल्‍डी इल्‍डी) का भी निवास स्‍थान है, जो विश्‍व की दुर्लभ नस्‍लो में एक है. यह केबुल लामजाओ के प्राकृतिक अधिवास क्षेत्र में पाया जाता है.
    1977 में इस अधिवास कोराष्‍ट्रीय उद्यान घोषित कर दिया गया है-- इसकी अनोखी विशेषता तैरता हुआ पार्क है जिसमें ’फुमडी’ नाम की वनस्‍पति उगती है. संगाई हिरण इसी वनस्‍पति पर निर्भर है.
    इसके अलावा भांगोपोकपी लोकचाओ वन्‍यप्राणी अभयारण्‍य को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है.
    और हाँ ..यहाँ के वनों में टेक्‍सस बकाटा, जिनसेंग जैसे दुर्लभ औषधीय पौधे भी पाए जाते है.
    जानते हैं इस राज्य के इतिहास के बारे में--
    ऐसा माना गया है कि ईसा से पूर्व भी यहाँ का इतिहास बहुत शानदार रहा है.राजवंशों का लिखित इतिहास सन् ३३ [तैतीस]से मिलता है.यह इतिहास पखंगबा के राज्‍यभिषेक के साथ शुरू होता है और उसके बाद कई राजाओं ने यहाँ राज्य किया.मणिपुर की स्‍वतंत्रता और संप्रभुता 19वीं सर्दी के शुरू तक बनी रही.मगर उस के बाद (1819 से 1825 तक) बर्मी लोगो ने यहां पर कब्‍जा करके शासन किया.ब्रिटिश शासन ने १८९१ में इस पर कब्जा किया.1947 में बाकि देश के साथ स्‍वतंत्र हुआ. 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने पर यह एक मुख्‍य आयुक्‍त के अधीन भारतीय संघ में भाग ‘सी’ के राज्‍य के रूप में शामिल हुआ था.
    21 जनवरी, 1972 को मणिपुर को पूर्ण राज्‍य का दर्जा मिला और उस समय 60 निर्वाचित सदस्‍यों वाली विधानसभा गठित की गईं.
    यहाँ मनाये जाने वाले त्यौहार--
    कहते हैं मणिपुर में पूरे साल ही कोई न कोई त्यौहार मनाया जाता है..
    प्रमुख त्‍योहार हैं-- लाई हारोबा, रास लीला, चिरओबा, निंगोल चाक-कुबा, रथ यात्रा, ईद-उल-फितर, इमोइनु, गान-नागी, लुई-नगाई-नी, ईद-उल-जुहा, योशांग(होली) दुर्गा पूजा, मेरा होचोंगबा, दिवाली, कुट तथा क्रिसमस आदि
    मणिपुर कैसे जाएँ?--
    १-सड़कें: 3 राष्‍ट्रीय राजमार्ग - i) रा. रा. - 39, ii) रा. रा - 53 और iii) रा. रा १५० हैं.
    सभी पडोसी राज्यों से सड़क मार्ग से आवागमन की सुविधा है.
    २-उड्डयन: इम्‍फाल हवाई अड्डा पूर्वोत्तर क्षेत्र में राज्‍य का दूसरा सबसे बड़ा हवाई अड्डा है, जो क्षेत्र के क्षेत्र को आइजोल, गुवाहाटी, कोलकाता, सिल्‍चर और नई दिल्‍ली को जोड़ता है.
    ३-रेलवे: मई 1990 में जिरिबाम तक रेल लाइन पहुंचाने के साथ ही यह राज्‍य भी देश के रेल-मानचित्र में शामिल हो गया है. यह इंफाल से 225 कि.मी. दूर है. इंफाल से 215 कि.मी. की दूरी पर स्थित दीमापुर निकटतम रेलवे स्‍टेशन है.
    क्या देखें??-
    मुख्‍य पर्यटन केंद्र हैं-—
    कांगला, श्री श्री गोविंदाजी मंदिर,ख्‍वाराम्‍बंद बाजार (इमाकिथेल), युद्ध स्‍मारक, श‍हीद मीनार, नूपी लेन (स्त्रियो का युद्ध) स्‍मारक परिसर, खोगंमपट्ट उद्यान, विष्‍णु मंदिर, सेंदरा, मारह, सिरोय गांव सिरोय पहाडिया, ड्यूको घाटी, राज्‍य संग्रहालय, केनिया पर्यटक आवास, खोग्‍जोम युद्ध स्‍मारक परिसर आदि.
    --------------------------------------------------------------------
    Mukhy Akarshan-
    ''सम्बन्लेई सेकपिल''[sambanlei ]
    sekpilon
    इम्फाल में ही तीन किलोमीटर दूर गिनिस बुक ऑफ़ रिकॉर्ड में दर्ज दुनिया का सब से लंबा पौधा ..Duranta repens Linn.-नीलकंठ के फूल का है.जो आम तौर पर २० फीट से ऊँचा नहीं बढ़ता.
    ' ''सम्बन ली सेकपिल 'नाम का यह अनोखा पौधा आसमान को जाने वाली सीढ़ी के नाम से भी मशहूर है.इस समय इस की ऊँचाई ६१ फीट है और इसमें ४४ पायदान बनायी गयी हैं.
    Shri Moiranthem Okendra Kumbi ने इसे उगाया है और वही इस को इस तरह से बढा कर रहे हैं.विस्तार से पढने के लिए यहाँ क्लिक करें-http://imphalwest.nic.in/sambanlei.html
    ['Samban-Lei Sekpil' the tallest Topiary in the World]
    पश्चिमी इम्फाल में आप श्री श्री गोविन्द जी का मंदिर देखने जाएँ तो इसे भी देखना न भूलें.
    अब मैं आप को इम्फाल के श्री श्री गोविन्दजी के मंदिर के बारे में बताती हूँ--
    radha krishna govindaji_temple

    यह कान्गला किले के परिसर में ही बना हुआ है.
    यह मंदिर १८ ४६ में महाराजा नारा सिंह [१८४४-१८४६ ]के शासन काल में बनवाया गया था.इस मंदिर का खासा ऐतिहासिक महत्व बताया जाता है.यह मणिपुर के पूर्व शासकों के महल कान्ग्ला के पास ही बनवाया गया था.
    १८६८ में आये भूकम्प में इस मन्दिर को बहुत नुकसान हुआ था.राधा-गोविन्द जी कि मूर्ति को भी नुकसान पहुंचा महाराजा चन्द्र्कीर्ति[१८५९-८६] ने इस मन्दिर को दोबारा बनवाया.यह मन्दिर राधा-कृष्ण को समर्पित है.
    इस मंदिर के ऊपर दो खूबसूरत सुनहरे गुम्बद हैं.और बाहर लगी है एक बहुत बड़ी घंटी.
    Govindji temple a viewgovind ji temple bell tower govindjee temple ki bell
    मंदिर में मुख्य रूप से विष्णु जी की मूर्ति है जिस के एक तरफ राधा -गोविन्द ,बलराम ,और कृष्ण की मूर्ति हैं उनके दूसरी तरह जनन्नाथ ,बालभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ लगी हुई हैं.
    मदिर के दखिन-पश्चिम की तरफ ’ रासमंडल ’एक पवित्र जगह है,यहां रासलीला प्रस्तुत की जाती है.
    manipur dance2 raasleela
    त्योहारों के समय इस मंदिर की रौनक देखते ही बनती है.
    होली[दोलिजात्रा ] के समय यहाँ पांच दिन ख़ास आयोजन होते हैं.वह समय यहाँ आने के लिए सर्वश्रेष्ठ है.उन दिनों सारी रात लड़के लड़कियां यहाँ का लोक नृत्य' थाबल चंग्बा 'करते हैं.
    mandir mein होली के पर्व की कुछ तस्वीरें--
    Manipur danceholi fest2
    manipur-thabal chongbagovind ji temple -holi-fest
    govindjee temple -holi celebrations-manipurgovindji temple mein pichkari day
    References-
    http://imphalwest.nic.in/
    http://cicmanipur.nic.in
    ***ShriKhrishn Janmashtami ki Hardik Shubhkamnaye***
    --Alpana

    नंदी हिल्स [कर्णाटक]

    karnataka-new

    नंदी हिल्स [कर्णाटक]

    चलते हैं एक ठंडे पहाडी स्थान पर,जिसे नंदी हिल्स के नाम से ख्याति प्राप्त है.
    यह स्थान कर्नाटक राज्य में है और यह कर्णाटक राज्य भारत के दक्षिण राज्यों में से एक है .

    इस राज्य की स्थापना १९५६ में हुई थी,इस का नाम मैसूर स्टेट था जिसे बदल कर १९७३ में कर्णाटक कर दिया गया.
    karnataka-road-mapइस के पश्चिम तट को अरब सागर छूता है .गोवा,तमिलनाडु,केरला,आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र इस के पडोसी राज्य हैं.क्षेत्रफल के हिसाब से यह भारत का ८ वां बड़ा राज्य है.कन्नड़ यहाँ की मुख्य भाषा है.इस राज्य में 27 जिले हैं और यहाँ के कर्णाटक संगीत के बारे में कौन नहीं जानता?

    कर्नाटक को अगरबत्ती, सुपारी, रेशम, कॉफी और चंदन की लकडी की राजधानी भी कहा जाता है.इसके अलावा यहां पर शिक्षित और प्रशिक्षित तकनीकी जनशाक्ति विशेष रूप से इंजीनियरिंग, प्रबंधन और आधारभूत विज्ञान के क्षेत्रों में, प्रचुर संख्‍या में उपलब्‍ध हैं.कुल जनसंख्‍या में से 60 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते है और उनका मुख्‍य व्‍यवसाय कृषि है..

    कर्नाटक में पर्यटन आकर्षण के कुछ ख़ास स्थान इस प्रकार हैं-:

    पूर्व की महाराजाओं की राजधानी मैसूर, वृन्‍दावन गार्डन और नजदीक स्थित श्री रंगापट्टनम श्रावण बेलगोला स्थित गोमातेश्‍वर की प्रसिद्ध एकाश्‍म मूर्ति (59 फीट ऊँची), बेलूर, हेलबिड, और सोमनाथपुर जहाँ प्रसिद्ध होयसाला इमारतें हैं, बादामी, एहोल और पट्टकल जहाँ 1300 वर्ष पुराने चट्टानों से बनाए गए पुराने ढाँचागत मंदिर है, हम्‍पी, प्रसिद्ध ओपन एयर मयूजियम (प्राचीन विजयनगर),
    गुलबर्ग बदिर और बीजापुर जो इण्‍डो-सारासेनिक इमारतों के लिए प्रसिद्ध है , दक्षिण कन्‍नड, उडूपी और उत्तरी कन्‍नड जिला [जहां खूबसूरत तट है.]--पत्तनों के लिए मंगलौर और कारवार, आकर्षक किलों के लिए चित्रदुर्ग, बीयर, बासाव कल्‍याण और गुलबर्ग; बांदीपुर राष्‍ट्रीय उद्यान, बानघटा नेशनल पार्क; रंगनथितु; कोक्‍करे बेलूर; मंडागडे, गुदावी, अट्टीवेरी (प्रसिद्ध पक्षी अभ्‍यारण्‍य); जोग, सथोडी, शिवनासमुद्र, मोगोड, गोकक, अब्‍बे, उन्‍चाली, इरूपु, हेब्‍बे, कलहटी (खूबसूरत झरने); मादीकेरी, केम्‍मानुगुन्‍डी, बी.आर.हिल्‍स, नंदी हिल्‍स, कुदरेमुख, कोदाचदरी [गर्मियों में ठंडे और मनोरम पहाडी स्‍थान हैं.]

    इसके अतिरिक्‍त, दशहरा, हम्‍पी, चालुक्‍य, कदम्‍ब, होयसाला, कोदागु और करागा त्‍यौहार कर्नाटक की कला और संस्‍कृति से परिचय कराते हैं.

    बंगलोर या कहिये बंगलुरु यहाँ की राजधानी है.कर्णाटक के बारे में लिखने को बहुत कुछ है ,और देखने को भी बहुत ही
    सुन्दर और मनोरम स्थल हैं मगर फिर कभी इस के समृद्ध इतिहास और संस्कृति के बारे में जानेंगे .

    आज हम आप को बताएँगे नंदी हिल्स या नंदी पर्वतमाला के बारे में-

    bangalore_road1Nandi Hills

    बंगलुरु से ६० किलोमीटर की दूरी पर और समुद्र से १४७८ मीटर की ऊँचाई पर ,चिक्बालापुर जिले में स्थित इस स्थान को बहुत कम लोग जानते हैं.इस लिए यहाँ पर्यटकों की भीड़ भी बहुत कम होती है.यह एक पिकनिक स्पॉट के रूप में ज्यादा जाना जाता है.

    roadside art

    यहाँ पर्यटकों के लिए सुन्दर पार्क हैं.यहाँ हरियाली तो है ही ,बहुत ही सुन्दर पक्षी भी यहाँ देखने को मिल जायेंगे.गर्मियों में ठंडी हवाओं का आनंद लेते हुए,फुर्सत से सुबह से शाम तक का समय प्रकृति की गोद में भीड़ भाड़ से दूर गुजारने के लिए यह बेहद रोचक स्थान है .यूँ तो सरकारी रेस्तरां -'मोर्या' है मगर आप अपने साथ खाने पीने का सामान भी ले जा सकते हैं..
    और हाँ, बंदरों से अपना सामान बचा कर रखीये.आप के हाथ से सामान छीन कर ले जा सकते हैं.

    जानते हैं यहाँ के इतिहास के बारे में-
    चोला राजाओं के शासन के समय इस पर्वत को आनंद गिरी कहा जाता था.नंदी पर्वतमाला को पहले नंदी दुर्ग के नाम से भी पुकारते थे.नंदी पर्वतमाला का नाम यहाँ स्थित प्राचीन नंदी मंदिर से पड़ा है.

    NandiHills-by Whac hydbd wrong step and..

    Entrance to the fort टीपू सुलतान के गर्मियों के आवास स्थान का प्रवेश द्वार .

    हैदर अली[टीपू सुलतान के पिताजी ]और टीपू सुलतान ने पहले से बने किले को विस्तार दिया ,उनके पश्चात् ब्रिटिश सरकार ने यहाँ के ठंडे मौसम के कारण यहाँ पर सरकारी बंगले और बागीचे बनवा दिए और इस जगह को एक हिल स्टेशन के रूप में विकसित किया.जनरल कब्बन के निवास स्थान को अब होटल की तरह इस्तमाल किया जाता है.

    नंदी हिल्स में देखने की प्रमुख जगहें-:
    Temple on top of Nandi Hills nandi statue

    1-यहीं पुराना मंदिर जिसमें नंदी बैल की हज़ार साल पुरानी मूर्ति है,और शिवजी -पार्वती के प्राचीन मंदिर भी हैं.
    150px-Nandi_at_Nandi_Hills नंदी की प्राचीन मूर्ति की तस्वीर
    2-किला-
    Tipu's Summer Residence by gourabगंगा काल में यह किला चिक्काबल्लापुर के मुखिया ने बनवाया था ,जिसका हैदर अली और टीपू सुलतान ने मरम्मत और विस्तार किया. यह किला टीपू सुलतान की गर्मियों में रहने की जगह थी जिसे वह तश्क -ऐ -जन्नत कहते थे. इस किले में ऐसी व्यवस्था थी की एक सैनिक छुप कर एक समय पर चार दिशाओं में शूट कर सकता था.दिवार और
    छत पर बनी पेंटिंग बुरी हालत में हैं.यह महल आम जनता के देखने के लिए बंद है.

    friend in fort kund at fort

    from topexit fort

    3-यहाँ पश्चिम में एक गुप्त सुरंग भी है.

    4-किले के उत्तर पूर्व में टिप्पू के सैनिकों के घोडों की चढाई के लिए एक मार्ग है.

    5-टिप्पू ड्राप-

    tippu drop
    [चित्र देखीये ]
    यह एक ऐसी जगह जहाँ से टीपू सुलतान के आदेश पर उनके दुश्मनों को गिराया जाता था. यहाँ से गिर कर मौत निश्चित है.क्योंकि यह एक सपाट चट्टान है और कहीं भी कोई पेड़ पौधा नहीं है. इस जगह से कई लोगों ने आत्महत्या की हैं.ऐसा वहां के स्थानीय लोगों का कहना है. एक बार कर्णाटक के शिवमोगा जिले के एक प्रेमी जोड़े रावी और वेद ने यहाँ से कूद कर अपनी जान दे दी थी ,उस घटना के बाद सरकार ने इस जगह की फेंसिंग करवा दी.
    6-अमूर्त सरोवर-
    पहाडियों से गिरता पानी यह सरोवर बनाता है यह सरोवर कभी सूखता नहीं है.

    7-फ़ुट हिल्स में पुरातत्व महत्व के भगवान् नरसिंह के मंदिर भी हैं.
    8- Nehru Nilaya,गाँधी निलय,और नेहरु हाउस संग्रहालय और सरकारी गेस्ट हाउस हैं.
    9-नंदी हिल्स में ब्रह्मश्रम नामक एक गुफा है जिसे संत रामकृष्ण परमहंस का साधना स्थल बताया जाताहै.
    10-श्री एम् .विस्वेस्वराया जिन्हें आधुनिक कर्नाटका का निर्माता कहा जाता है ,उनका घर जिसे अब म्यूज़ियम बना दिया गया
    है,नंदी हिल्स से कुछ दूरी पर स्थित मुद्देनाहाली में है.
    ** **ज्ञात हो ,पेन्नर,अरकावती ,पलार,पोनियार -नंदी हिल्स से निकलने वाली नदियाँ हैं.

    कैसे जाएँ-
    -नंदि दुर्ग तक जाने के लिए-

    volva bus by BMTC AC Bus with Lady ticket collector
    KSRTC [कर्णाटक पर्यटन विभाग ]की हर रोज़ बस सेवाएं उपलब्ध हैं.
    -कार /जीप किराए पर या ड्राईवर के साथ ले सकते हैं.
    -अपनी बाईक पर लम्बी राईड पर जाना हो तो यह रास्ता बहुत ही अच्छा है.

    कब जाएँ-
    वर्ष पर्यंत

    -खबरों में-
    [इंडो-एशियन न्यूज सर्विस-अप्रिल२००९] दुनिया की जानीमानी कंपनी मैरियट इंटरनेशनल ने ने बंगलौर के प्रमुख भवन निर्माता प्रेस्टीज समूह के साथ मिलकर नंदी हिल्स के पास 275 एकड़ भूमि पर 300 कमरों का ,18 होल वाले गोल्फ कोर्स से युक्त एक पांच सितारा रिसोर्ट होटल बनाने का फैसला किया है.प्रेस्टीज समूह के मुखिया इरफान रजक के अनुसार यह होटल 2010 तक चालू हो जाएगा।

    References-

    Official site of Karnataka.

    Wikipedia.

    Map of india.com

    Please note--Except Nandi old statue picture All other pictures of nandi hills [posted here] are taken by GAURAB,My sincere thanks to him.

    [Pictures-You can view them bigger by clicking on them.]

    -Alpana